राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग में आग लगी या लगाई गई? लिग्नाईट रेट स्कैम की फाइलें जलकर राख, जानें पूरा मामला

राजस्थान विद्युत विनियामक आयोग में आग लगी या लगाई गई? लिग्नाईट रेट स्कैम की फाइलें जलकर राख, जानें पूरा मामला
राजस्थान
26 Apr 2026, 02:05 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary

आज से ठीक दो दिन पहले जयपुर में सहकार मार्ग पर स्थित जयपुर विद्युत विनियामक आयोग की चैथी मंजिल पर मीटिंग रूम में आग लग गई। आग लगने की वजह शाॅर्ट सर्किट बताई गई। बताया गया है कि कुछ रिकाॅर्ड जल गया गया है साथ ही ये भी कहा गया कि जो रिकाॅर्ड जला है वो डिजीटली भी मौजूद है ऐसे में चिंता की कोई बात नहीं है। लेकिन हमनें जब पड़ताल की तो हकीकत कुछ और ही सामने आई। आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला।

दरअसल मीटिंग हाॅल में आग लगने से बाड़मेर में लिग्नाइट खनन के काम में लगी कंपनी एसडब्ल्यूएमएल के दस्तावेज जलकर राख हो गए। ये वहीं दस्तावेज थे जो कंपनी ने बड़ी मुश्किल से आईआरसी को सौंपे थे इसके लिए हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जाना पड़ा था। कोर्ट के आदेश के बाद कंपनी ने ये महत्वपूर्व दस्तावेज करीब 42 कार्टन में रखकर आईआरसी को सौंपे थे। ऐसे में अब मीटिंग हाॅल में लगी आग ने संशय पैदा कर दिया है। क्योंकि बंद कमरे में अचानक आग कैसे लग सकती है? वहां पर कोई मीटिंग नहीं चल रही थी? ऐसे में बंद पड़े एसी में आग लगना भी काफी हैरान करने वाला है। विनियामक आयोग के अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि इस मामले की जांच होगी लेकिन कैसे?

एक ही कंपनी वर्षों से कर रही खनन

बता दें कि बाड़मेर लिग्नाइट पावर प्रोजेक्ट में करीब 8 इकाईयां है। प्रत्येक इकाई की क्षमता करीब 135 मेगावाट की है। यहां से बनी बिजली जोधपुर डिस्काॅम को दी जाती है। अब बिजली कौनसी रेट में दी जाती है यह तय करने का काम विनियामक आयोग करता है। लिग्नाइट माइंनिग का काम बीएमएलसीएल की ओर से किया जाता है। यह सरकार और जेएसडब्ल्यू का जाॅइंट वेंचर हैं। जिसमें सरकार की भागीदारी 51 प्रतिशत है। वहीं 49 प्रतिशत हिस्सेदारी जेएसडब्ल्यू की है। इसके अलावा माइनिंग की रेट भी विनियामक आयोग तय करता है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि पूरे देश में कोल ब्लाॅक का आवंटन कोयला मंत्रालय की ओर से किया जाता है ऐसे में राजस्थान सरकार लिग्नाइट कोयले का आवंटन वर्षों से एक प्राइवेट कंपनी को कैसे दे सकती है? इससे तो राजस्व का नुकसान भी हो रहा है।

सरकार ही लगा रही अपने खजाने को चपत

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आज लिग्नाइट कोयले की माइनिंग किस रेट पर की जा रही है? कोल ब्लाॅक का आवंटन हर 6 महीने में होता है? लेकिन यहां पर वर्षों से एक ही कंपनी के पास यह अधिकार क्यों है? इसके बाद जब विनियामक आयोग ने बिडिंग की बात कही तो ठेका एक बार फिर से जेएसडब्ल्यू ने अपनी कंपनी एसडब्ल्यूएमएल को दिला दिया। अब सवाल यह है कि माइनिंग का रेट जब विनियामक आयोग को तय करना है तो वह यह तय क्यों नहीं कर पा रहा है और इन सबके बीच सरकार कहां है? इसके बाद जब कोर्ट ने दस्तावेज मांगे तो एसडब्ल्यूएमएल ने दस्तावेज देने में आनाकानी की। फिर दस्तावेज दिए तो अब आग लगाकर ये दस्तावेज खत्म कर दिए? बिना सरकारी अधिकारियों और सरकार की मिलीभगत के कोई प्राइवेट कंपनी ये सब नहीं कर सकती।

अब देखना यह है कि विनियामक आयोग केे चेयरमैन राजेश कुमार ने यह वादा किया था कि वे इस अग्निकांड की जांच करवाएंगे। अब यह जांच कहां तक होती है और कैसे होती है यह भी देखने वाली बात होगी।


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