JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल ने लिया सुधांशु पंत का नाम, पूर्व मुख्य सचिव पर घूमेगी जांच की सुई?

JJM घोटाले में सुबोध अग्रवाल ने लिया सुधांशु पंत का नाम, पूर्व मुख्य सचिव पर घूमेगी जांच की सुई?
राजस्थान
13 Apr 2026, 12:07 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Rajasthan JJM Scam: राजस्थान के चर्चित 960 करोड़ रुपये के जल जीवन मिशन घोटाले में एक बड़ी खबर सामने आई है। वो ये कि ACB की गिरफ्त में रिटायर्ड IAS अधिकारी सुबोध अग्रवाल (Subodh Agarwal) ने अब अपने मुंह से पूर्व मुख्य सचिव सुधांशु पंत का नाम लिया है। सुबोध ने कहा कि मेरे कार्यकाल के तो बस 4 ही केस हैं जबकि 33 मामले को सुधांशु पंत (Sudhanshu Pant) के कार्यकाल के हैं। सुबोध अग्रवाल के इस बयान ने अब JJM घोटाले (Jal Jivan Mission Scam) में सुधांशु पंत की भूमिका का सवालिया निशान छोड़ दिया है।

33 केस तो सुधांशु पंत के समय के- सुबोध अग्रवाल

सुबोध अग्रवाल को ACB दिल्ली से गिरफ्तार किया था। सोमवार को उन्हें फिर से जयपुर की ACB की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। सुबोध अग्रवाल ने कोर्ट के बाहर मीडिया को बयान दिया कि फाइनेंस कमेटी के जिन 37 मामलों की बात हो रही है उनमें से उनके कार्यकाल के सिर्फ 4 हैं। बाकी 33 केस तो पूर्व मुख्य सचिव सुधांश पंत के वक्त के हैं, जिसमें करीब 600 करोड़ का मामला है। अब सुबोध अग्रवाल का ये बयान तो सीधे तौर पर एक बड़े 'ब्लेम गेम' की तरफ इशारा कर रहा है। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है, जबकि घोटाले की जड़ें कहीं और हैं।

125 सवाल पूछे गए सुबोध अग्रवाल से

बता दें कि पिछले तीन दिनों से सुबोध अग्रवाल ACB की रिमांड पर थे। जहां उनसे करीब 125 कड़े सवाल पूछे गए लेकिन सोमवार को जब कोर्ट में पेशी हुई, तो माहौल काफी गरमा गया। एक तरफ एसीबी ने और 3 दिन की रिमांड मांगी, तो दूसरी तरफ सुबोध अग्रवाल ने मीडिया के सामने आकर ऐसे खुलासे किए, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।

3 दिन की रिमांड पर जांच एजेंसी का तर्क है कि घोटाला बड़ा है और कड़ियों को जोड़ना अभी बाकी है। उधर सुबोध अग्रवाल के वकील ने विरोध किया। बचाव पक्ष ने कहा कि उन्हें रिमांड प्रार्थना पत्र की कॉपी तक नहीं दी गई। बिना कॉपी दिए वो अपना पक्ष कैसे रखेंगे? ये आरोपी के कानूनी अधिकारों का हनन है। इस बात पर ACB के वकील ने कहा कि यह केस डायरी का हिस्सा है, इसे सार्वजनिक या वकील को साझा नहीं किया जा सकता।

इस पर जज ने कड़ा रुख अपनाया और कहा कि ACB के पास 15 मिनट का समय हैं। इसमें वो कोई कानूनी प्रावधान या पिछला आदेश दिखाएं जो उन्हें कॉपी देने से रोकता हो।

क्या है JJM का मामला?

बता दें ये मामला फर्जी सर्टिफिकेट्स के आधार पर टेंडर हासिल करने से शुरू हुआ था। 'गणपति ट्यूबवेल्स' और 'श्याम ट्यूबवेल्स' जैसी कंपनियों ने इरकॉन (IRCON) के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाए। आरोप है कि सुबोध अग्रवाल ने PHED के अतिरिक्त मुख्य सचिव रहते हुए इन फर्मों को फायदा पहुंचाया। ACB के टेंडर्स में 'साइट विजिट' की ऐसी शर्तें जोड़ी गईं। जिससे प्रतिस्पर्धा खत्म हो गई और प्रीमियम 30-40% तक बढ़ गया। अब तक इस मामले में 11 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जबकि 3 अभी भी फरार हैं। सुबोध अग्रवाल को पकड़ने के लिए ACB ने 21 शहरों में 260 ठिकानों पर छापे मारे थे। जिसके बाद उन्होंने खुद को सरेंडर जैसा बताया, हालांकि ACB इसे गिरफ्तारी कह रही है।


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