Private Bus Strike: प्राइवेट बसों की हड़ताल से चरमाराया शहर का ट्रांसपोर्ट, सरकारी बसों की कमी से दर-दर भटर रहे यात्री

Private Bus Strike: प्राइवेट बसों की हड़ताल से चरमाराया शहर का ट्रांसपोर्ट, सरकारी बसों की कमी से दर-दर भटर रहे यात्री
राजस्थान
24 Feb 2026, 04:33 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान में 30 हजार से अधिक निजी बसों का संचालन ठप हो गया है। RTO-DTO की कार्यशैली के खिलाफ बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को और तेज हो गई। सरकार और संचालकों के बीच हुई बातचीत बेनतीजा रहने से लाखों यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

राजस्थान में सोमवार देर रात से निजी बसें सड़कों से पूरी तरह गायब हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों की कथित सख्ती और भारी चालानों के विरोध में बस ऑपरेटर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया है। इस कदम का असर सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों तक पहुंच गया है।


वार्ता विफल, आंदोलन को मिला दूसरे राज्यों का समर्थन


बता दें कि मुख्यमंत्री कार्यालय में सचिव अखिल अरोड़ा की मौजूदगी में हुई वार्ता में कोई सहमति नहीं बन सकी। राजस्थान के कई प्रमुख ऑपरेटर्स जैसे प्रवीण अग्रवाल और सत्यनारायण ने सरकार के रवैये को कठोर बताया। वार्ता नाकाम होने के बाद गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के निजी बस संचालकों ने भी राजस्थान के आंदोलन का समर्थन कर दिया। इससे हड़ताल अब अंतरराज्यीय आयाम ले चुकी है।


यातायात व्यवस्था चरमराई, बस अड्डों पर भीड़

निजी बसों की हड़ताल के चलते जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर और उदयपुर के बस स्टैंड यात्रियों से खचाखच भरे हुए हैं। ग्रामीण इलाकों में तो हालात और भी ज्यादा गंभीर हो चले हैं। क्योंकि वहां रोडवेज की सेवा सीमित है, सरकारी बसें कम हैं और लोग मुख्य रूप से इन प्राइवेट बसों पर ही निर्भर हैं।

इससे रोजाना लगभग 25 लाख यात्रियों के प्रभावित होने की बात कही जा रही है। करीब 3 लाख ऑनलाइन टिकट पहले ही बुक हो चुके थे। जिसके चलते ऑपरेटर्स को प्रतिदिन 20 करोड़ रुपये तक रिफंड देना पड़ सकता है।


क्यों हो रही ये हड़ताल?

दरअसल राजस्थान बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि जयपुर RTO प्रथम और द्वितीय के भारी-भरकम चालान और बसें सीज करने की कार्रवाई अनियमित और सख्त है। संचालकों का दावा है कि मामूली तकनीकी खामियों को भी बड़ी कार्रवाई में बदल दिया जा रहा है। इनकी मांगें है कि निलंबित बसों की RC तुरंत बहाल की जाए। यात्रियों को बीच रास्ते उतारकर बसें जब्त करने की प्रक्रिया बंद हो। AIPP परमिट टैक्स को मध्यप्रदेश और यूपी की तरह घटाया जाए। मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 153 के तहत की जा रही कड़ी कार्रवाई रोकी जाए।


सरकार ने रोडवेज की अतिरिक्त बसें चलाईं, लेकिन राहत सीमित

निजी बसों की हड़ताल से पैदा हुए इस गंभीर संकट को देखते हुए सरकार ने अतिरिक्त रोडवेज बसें लगाने के निर्देश दिए हैं लेकिन 30 हजार निजी बसों के मुकाबले सरकार का ये इंतजाम ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रह है। अगर ये हड़ताल ऐसी ही चलती रही तो होली के त्यौहार पर यात्रियों को और ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि उन दिनों बेतहाशा लोग अपने-अपने घरों को जाते हैं। ऐसे में सरकार इसके लिए क्या कदम उठाती है, ये देखने वाली बात होगी। 


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