भाटी के बाद अब नरेश मीणा से भिड़ेंगी टीना डाबी, सुलग रही इनकी सियासत

IAS Tina Dabi: राजस्थान की सबसे चर्चित IAS अधिकारी टीना डाबी ने टोंक का कार्यभार संभालते ही अपनी रफ़्तार पकड़ ली है। बीते गुरुवार को कलेक्टर डाबी ने लगातार 7 घंटे तक मैराथन जनसुनवाई की लेकिन यह सिर्फ सुनवाई नहीं थी, बल्कि उन लोगों के लिए एक चेतावनी थी जो सालों से फाइलों को दबाकर बैठे थे।
जिले के दूरदराज इलाकों से आए 196 फरियादी अपनी उम्मीदें लेकर पहुंचे थे। कलेक्टर ने ना केवल एक-एक व्यक्ति की समस्या को संवेदनशीलता से सुना, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों की क्लास भी लगा दी। चाहे वो सीवरेज समस्या हो, या अस्पताल प्रशासन के खिलाफ शिकायत-टीना डाबी ने साफ कर दिया कि टोंक में अब 'सिस्टम' को सुधरना ही होगा।
टोंक में खुलेंगी अब पुरानी फाइलें
इस खबर का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अब टोंक में पुरानी फाइलें खुलना शुरू हो गई हैं। सूत्रों की मानें तो जिला प्रशासन अब उन लोगों को राडार पर ले रहा है जो कानून-व्यवस्था को चुनौती देते आए हैं। इसमें नरेश मीणा का भी नाम आ सकता है।
देवली-उनियारा उपचुनाव के दौरान हुए चर्चित 'थप्पड़ कांड' के बाद नरेश मीणा पहले से ही कानूनी पचड़ों में फंसे हैं। हाल ही में टोंक की SC-ST कोर्ट में उनकी जमानत निरस्त करने पर सुनवाई हुई है। प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट है कि टीना डाबी के नेतृत्व में अब पुलिस और प्रशासन उन सभी मुकदमों की समीक्षा कर रही है। सरकारी काम में बाधा, तोड़फोड़ और अतिक्रमण जैसे मामलों की फाइलें फिर से धूल झाड़कर बाहर निकाली जा रही हैं। जानकार मान रहे हैं कि जिस तरह टीना डाबी ने अतिक्रमण हटाने के लिए 'पीले पंजे' यानी बुलडोजर को एक्टिव करने के निर्देश दिए हैं, उसमें कई ऐसे रसूखदार लोग भी चपेट में आ सकते हैं जो नरेश मीणा के करीबी माने जाते हैं या उनके आंदोलनों का हिस्सा रहे हैं।
इस जनसुनवाई के दौरान देवली-उनियारा विधायक राजेंद्र गुर्जर की मौजूदगी ने भी राजनीतिक हलचल तेज कर दी है। कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा कि जो काम ग्राम पंचायत या ब्लॉक स्तर पर हो सकते थे, उनके लिए जनता को जिला मुख्यालय क्यों आना पड़ रहा है? उन्होंने चेतावनी दी कि "अनावश्यक लंबित मामले अब बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।" यानी साफ है कि एक तरफ टीना डाबी का प्रशासनिक हंटर चल रहा है, तो दूसरी तरफ नरेश मीणा जैसे नेताओं के लिए आने वाले दिन मुश्किल भरे हो सकते हैं। अगर पुरानी फाइलों से सबूतों की कड़ियां जुड़ीं, तो टोंक में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक भूचाल आना तय है।
इस लिंक को शेयर करें

