अपने ही समर्थकों पर भड़क उठे रविंद्र भाटी, जानें क्या कहा?

Bhati and Rawana: राजस्थान की राजनीति में कहावत है कि "नेता वही, जिसके पीछे जनता खड़ी हो।" लेकिन क्या हो जब यही जनता, यही समर्थक अपने ही नेता के लिए गले की हड्डी बन जाएं? राजस्थान की सियासत में इन दिनों कुछ ऐसा ही मंजर देखने को मिल रहा है। रविंद्र भाटी के नाम पर जहां हज़ारों की भीड़ जुट जाती है। लेकिन आज इन्हें ही अपने समर्थकों को चुप कराने के लिए बोलना पड़ा है।
क्या कहा रविंद्र सिंह भाटी ने?
दरअसल भाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि “प्रिय नौजवान साथियों, आपका अटूट स्नेह, विश्वास और समर्थन मुझे हमेशा ऊर्जा प्रदान करता रहा है। आज उसी विश्वास के साथ आपसे एक छोटी सी, लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण अपील कर रहा हूँ। वर्तमान समय में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचनाओं को साझा करने का एक मजबूत स्तंभ है इसे हम समाज को जोड़ने, सकारात्मक सोच फैलाने और अच्छे कार्यों के लिए इस्तेमाल करें। अगर आप स्वयं को मेरा समर्थक मानते हैं, तो मेरी आपसे विनम्र अपील है कि किसी भी जाति, धर्म, वर्ग या व्यक्ति विशेष के खिलाफ अमर्यादित टीका-टिप्पणी से दूर रहें।“
“मेरे राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी पूंजी अपणायत, भाईचारा और आपसी सम्मान रही है जो कि मुझे मेरे पूर्वजों से मिली हैं। राजनीति और वोट से कहीं ऊपर हमारा सामाजिक सौहार्द है, जिसे बनाए रखना हम सबकी सामुदायिक जिम्मेदारी है।बीते कुछ समय से हमारी इस पावन अपणायत की धरती पर सुनियोजित तरीके से नकारात्मकता फैलाकर आपसी वैमनस्य बढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं। लेकिन यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम अपने स्वविवेक, समझदारी और संयम का परिचय देते हुए इन प्रयासों को सफल न होने दें। बरसों से चली आ रही भाईचारे, अपनत्व और सामाजिक समरसता की इस परंपरा को बनाए रखना ही हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।“
क्या रावणा मुद्दे पर आया है भाटी का बयान?
भाटी का बयान ऐसे वक्त पर आया है जब हाल ही में गायक छोटू सिंह रावणा और भाटी के बीच हुए विवाद ने सोशल मीडिया पर आग लगा दी। उसके बाद भाटी के समर्थकों ने जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया, उसने पूरे रावणा राजपूत समाज को भाटी के खिलाफ खड़ा कर दिया। आलम यह है कि कल तक जो लोग भाटी को अपना आदर्श मानते थे, आज वो उनके खिलाफ ज्ञापन सौंप रहे हैं।
मगर अब यही समर्थन इन दिग्गजों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। सोशल मीडिया पर इन समर्थकों की 'ट्रोल आर्मी' ने एक ऐसा माहौल बना दिया है जहाँ कोई भी 'न्यूट्रल' व्यक्ति सुरक्षित नहीं है। ये समर्थक चाहते हैं कि सोशल मीडिया पर मौजूद हर कोई उन्हीं की तरह इन नेताओं की जय जयकार करे, उनके लिए सिर्फ अच्छा लिखे, कोई उन्हें सही सलाह नहीं दे, कोई भी ज्ञान नहीं दे। क्या यह संभव है? बिल्कुल भी नहीं। क्या भाटी के समर्थक समझ पा रहे हैं कि उनकी एक गाली उनके नेता की छवि को कितना नुकसान पहुँचा रही है?
इस लिंक को शेयर करें

