RPSC पेपर लीक: बाबूलाल कटारा का बड़ा कबूलनामा! गहलोत सरकार के मंत्री-विधायकों से थी सेटिंग!

RPSC पेपर लीक: बाबूलाल कटारा का बड़ा कबूलनामा! गहलोत सरकार के मंत्री-विधायकों से थी सेटिंग!
राजस्थान
07 Jan 2026, 12:03 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

RPSC Paper Leak Babulal Katara ED Enquiry: पूर्व RPSC मेंबर बाबूलाल कटारा ED की पूछताछ में आए दिन चौंकाने वाला खुलासा कर रहा है। अब कटारा ने ऐसे-ऐसे नाम उगले हैं कि पूरे राजस्थान की राजनीति हिल गई है। ED के सामने बाबूलाल कटारा ने साफ-साफ कहा है उसे RPSC में लगवाने में किसका-किसका हाथ था। कांग्रेस नेता दिनेश खोड़निया का नाम तो कटारा पहले ही ले चुका था। लेकिन अब उसने उन नेताओं के नाम लिए हैं, जो कांग्रेस सरकार के दौरान सांसद, मंत्री और विधायक रहे थे।


कांग्रेस के मंत्री, सांसद, विधायक ने की थी बाबूलाल कटारा की सिफारिश


कटारा ने कहा कि 2013 से 2020 तक वे उदयपुर के ट्राइबल रिसर्च इंस्टीट्यूट में सांख्यिकी निदेशक था और इसी दौरान उसकी पहुंच इन नेताओं और अफसरों की ऊंची लॉबी तक बन गई थी। कटारा ने बताया कि उसे RPSC सदस्य बनाने के लिए सिफारिशों की लाइन लग गई थी। उसने कहा कि कांग्रेस के पूर्व सांसद रघुवीर मीणा, पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह मालवीया, विधायक फूलसिंह मीणा और पूर्व जनजाति मंत्री अर्जुन बामणिया ने उसे RPSC मेंबर बनाने की सिफारिश की थी। इन सबमें सबसे ऊपर डूंगरपुर जिला कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश खोड़निया का नाम है।


बड़े लोगों ने अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में मदद करने को कहा


कटारा ने कहा कि इन सबने ‘अपने-अपने कारणों’ के लिए कटारा को RPSC में बिठाने की कोशिश की। उसने 15 अक्टूबर 2020 को rpsc का सदस्य पद ग्रहण किया। इस दौरान उसे कई बड़े लोगों ने अभ्यर्थियों के इंटरव्यू में मदद के लिए संपर्क किया था। लेकिन उनसे कोई पैसा नहीं लिया। इनमें उदयपुर के पूर्व सांसद रघुवीर मीणा, अर्जुन बामणिया, महेन्द्र सिंह मालवीया और खोड़निया शामिल थे।


बता दें कि इससे पहले कटारा ने ईडी को कहा था कि RPSC का मेंबर बनने के लिए उसने दिनेश खोड़निया से 1 करोड़ 20 लाख रुपए की डील की थी और सिर्फ डील ही नहीं 40 लाख रुपए दो बार नकद दिए गए और ये पैसा गया सीधे दिनेश खोड़निया के सहयोगियों तक। इससे पहले हाल ही में कटारा ने एक और चौंकाने वाला खुलासा किया था। कि इंटरव्यू से पहले ही अभ्यर्थियों का पास या फेल होना तय कर लिया जाता था। इसके लिए अभ्यर्थियों की पहले फोटो और नाम भेजा जाता था। ये डिटेल चेयरमैन और मेंबर्स तक पहुंचा दी जाती थी।


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