TUE, 10 FEBRUARY 2026

तिलक लगवाते समय क्यों रखते है सिर के पीछे हाथ?

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धर्म
09 Feb 2026, 05:03 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

Tilak Science: आपने अक्सर लोगों को देखा होगा कि वे माथे पर तिलक लगाते या लगवाते समय अपने सिर के पीछे हाथ रखते हैं। आपने अपने घर में भी ऐसा देखा होगा। लेकिन क्या आपने कभी इसके पीछे का कारण जानना चाहा है? क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे ना सिर्फ धार्मिक मान्यताएं हैं बल्कि साइंस के मजेदार फैक्ट्स भी इससे जुड़े हैं।


वैसे तो तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ रखने को लेकर हिंदू धर्म में कई मान्यताएं प्रचलित हैं। जो विभिन्न स्थान और समुदाय के अनुसार अलग-अलग हैं। इनमें से कुछ प्रमुख मान्यताओं की चर्चा हम यहां करेंगें।


ऊर्जा का प्रवाह-


योग शास्त्र के अनुसार, हमारे माथे पर भौहों के बीच आज्ञा चक्र स्थित होता है, जो ध्यान का केन्द्र है। साथ ही, सिर के सबसे ऊपर ब्रह्मरंध्र (सहस्रार चक्र) होता है, जिसे ऊर्जा और चेतना का केन्द्र माना जाता है। आज्ञा चक्र पर तिलक लगाते समय ऊर्जा आज्ञा चक्र से सहस्रार चक्र की ओर उठती है और इसी ऊर्जा को संतुलित करने के लिए सिर के पीछे या सहस्रार चक्र पर हाथ रखा जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से ये ऊर्जा बाहर नहीं निकलती, दोनों चक्र सक्रिय हो जाते हैं और मानसिक शांति एवं एकाग्रता प्राप्त होती है।


आध्यात्मिक कारण-


हिन्दू धर्म में तिलक लगाना धार्मिक और आध्यात्मिकता का प्रतीक है और खाली सिर के साथ पूजा करने को अशुभ माना जाता है, इसलिए तिलक लगाया जाता है ताकि पूजा शुभ और सुरक्षित हों। इसका एक अर्थ ये भी है कि व्यक्ति आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए समर्पित है और इससे व्यक्ति ईश्वर से जुड़ा हुआ महसूस करता है।


वैज्ञानिक कारण-


सिर के पीछे हाथ रख कर तिलक लगवाने से, व्यक्ति के शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होती है। यह मुद्रा मस्तिष्क और तंत्रिकाओं को शांत रखने में मदद करती है, जिससे ध्यान और पॉजिटीविटी बढ़ती है। साथ ही, आज्ञा चक्र पर दबाव पड़ने से पीनियल और पिट्यूटरी ग्रंथियां सक्रिय हो जाती है, क्योंकि ये ग्रंथियां तिलक के स्थान के करीब होती है। सिर के एक्युप्रेशर प्वाइंट्स पर दबाव पड़ने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है, जिससे तनाव कम होता है, हॉर्मोन्स संतुलित रहते हैं और मानसिक शांति का अनुभव होता है, जिससे विचारों में स्पष्टता आती है।


यह भी माना जाता है पहले के समय में लोग सिर पर पगड़ी पहनते थे। उसे उतार कर पूजा करना फिर पहनना कठिन-सा था, इसलिए वक्त के साथ लोगों ने सिर पर कपड़ा रखकर पूजा करने का चलन बना दिया। बाद में लोग इसे अपनी सुविधानुसार बदलते चले गए। अब सिर्फ सिर पर हाथ रख कर काम चला लेते है। वहीं, कुछ लोंगो का कहना है कि पहले लोग खेतों में काम करते थे और जब वे तिलक लगवाने के लिए झुकते थे तो सिर की गंदगी आरती की थाल में गिर जाती थी। इसलिए उन लोंगो ने सिर पर हाथ रख कर तिलक लगवाना शुरु कर दिया, जिसे बाद में लोगों ने धार्मिक मान्यता के रूप में अपना लिया।


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कंटेंट- कृति कुमारी




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