THU, 15 JANUARY 2026

इन 2 ताकतवर मुस्लिम देशों के साथ मिलकर पाकिस्तान बना रहा इस्लामिक नाटो! इजरायल के साथ मिलकर भारत जवाब की कर रहा तैयारी?

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अंतरराष्ट्रीय
12 Jan 2026, 03:23 pm
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रिपोर्टर : Jyoti Sharma

मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया की राजनीति एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक बदलावों की तरफ बढ़ रही है। तुर्किए, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच सैन्य सहयोग को लेकर जारी बातचीत अब लगभग निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। कई अंतरराष्ट्रीय जानकार इस उभरते गठजोड़ को अनौपचारिक रूप से ‘इस्लामिक नाटो’ का नाम दे रहे हैं।


क्या है ये इस्लामिक नाटो?


दरअसल सितंबर 2025 में सऊदी अरब और पाकिस्तान ने स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन किए थे। इस समझौते में ये सिद्धांत भी शामिल है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर किसी का हमला होता है तो ये समझौते में शामिल सभी देशों पर अटैक माना जाएगा। ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे नाटो में होता है। वहीं अब तुर्किए के इसमें शामिल होने की संभावना जताई जा रही है, जिसने क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को नई दिशा दे दी है।


बेहद प्रभावशाली हैं सऊदी अरब और तुर्किए


जानकारों के मुताबिक ये गठबंधन कई रणनीतिक वजहों से ताकतवर साबित हो सकता है। जैसे सऊदी अरब के पास अपार ऊर्जा संसाधन और आर्थिक शक्ति है। पाकिस्तान के पास परमाणु क्षमता है, बड़ी सेना और इस्लामिक दुनिया में प्रभाव है। वहीं तुर्किए को सबसे मजबूत और ताकतवर इस्लामिक देश माना जाता है। तुर्किए की मजबूत पैठ एशिया और यूरोप दोनों में ही है। वो नाटो का सदस्य है और आधुनिक रक्षा उद्योग और युद्ध का अनुभवी है। ऐसे में जानकारों का कहना है कि इन तीनों की संयुक्त सैन्य शक्तियां, मिडिल ईस्ट, दक्षिण एशिया और उत्तरी अफ्रीका तक प्रभाव डाल सकती हैं।


कौन-कौन से देशों में चिंता बढ़ी?


इस संभावित गठबंधन से भारत, इजरायल, ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया जैसे देशों में भू-रणनीतिक चिंता बढ़ सकती है। क्योंकि जिस तरह से तुर्किए और पाकिस्तान एक दूसरे के करीब आ रहे हैं और जिस तरह तुर्किए पाकिस्तान को सैन्य और वित्तीय सहायता दे रहा है, वो विश्व के मौजूदा समीकरण को चुनौती दे सकते हैं।


इजरायल के साथ भारत कर सकता है साझेदारी


अब सवाल ये उठ रहा है कि अगर पाकिस्तान ऐसी रणनीति अपना रहा है तो भारत इसका जवाब कैसे देगा? तो जानकार कहते हैं कि भारत इसका सामना करने के लिए इजरायल की मदद ले सकता है। क्योंकि हाल के सालों में इजरायल और भारत के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है और अहम भी हो गया है। भले ही वैश्विक मंचों पर कुछ कूटनीतिक मुद्दों पर अलग हो, लेकिन सुरक्षा साझेदारी लगातार मजबूत हुई है। दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग के मुख्य क्षेत्रों में मिसाइल रक्षा प्रणाली, ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, रडार और निगरानी सिस्टम, संयुक्त निर्माण, साइबर सुरक्षा और उन्नत तकनीक शामिल हैं। बता दें कि 2020–24 के बीच इजरायल के कुल हथियार निर्यात का 34% भारत को गया। हाल ही में भारत ने SPICE मिसाइलों सहित 8.7 अरब डॉलर की खरीद को मंजूरी दी है।


इजरायल की रक्षा तकनीक क्यों है खास?


गौरतलब है कि इजरायल मिसाइल डिफेंस, लेजर हथियार, ड्रोन टेक्नोलॉजी और साइबर सुरक्षा में वैश्विक नेता माना जाता है। यही वजह है कि भारत इस साझेदारी को केवल हथियार खरीद के रूप में नहीं, बल्कि रणनीतिक सहयोग के रूप में देखता है।


क्या है भारत की रणनीति?


पाकिस्तान के इस इस्लामिक नाटो और बदलती वैश्विक राजनीति से निपटने के लिए भारत अब बहु-स्तरीय संतुलन साध रहा है। भारत के इजरायल, ग्रीस और साइप्रस के साथ मजबूत संबंध हैं। I2U2 यानी भारत–इजरायल–UAE–अमेरिका के जरिए आर्थिक और तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है। वहीं हिंद महासागर क्षेत्र में सैन्य तैयारियां भी भारत की लगातार चल ही रही हैं। इसके अलावा रक्षा निर्माण में आत्मनिर्भरता और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर में भी भारत बड़े बदलाव कर रहा है। भारत की कोशिश है कि इस बदलती वैश्विक राजनीति के बीच अपनी सुरक्षा, आर्थिक साझेदारी और भू-रणनीतिक प्रभाव को और मजबूत बनाए रखा जाए।


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