Lenskart विवाद से चौतरफा किरकिरी होने के बाद कंपनी का बड़ा फैसला! पढ़िए विवाद की पूरी वजह और Inside Story

Lenskart विवाद से चौतरफा किरकिरी होने के बाद कंपनी का बड़ा फैसला! पढ़िए विवाद की पूरी वजह और Inside Story
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21 Apr 2026, 04:59 pm
रिपोर्टर : Dushyant

Lenskart Controversy: कुछ दिनों पहले लेंसकार्ट के मुंबई वाले शोरूम का एक विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें बजरंग दल के कुछ सदस्य अंदर जाकर सभी स्टाफ को तिलक लगाते नज़र आ रहे हैं। इसकी वजह थी एक खबर कि मुंबई वाले लेंसकार्ट के शोरूम में हिन्दुओं को तिलक लगाने, कलावा पहनने, बिंदी लगाने जैसी चीज़ों से मना किया जा रहा है। लेकिन मुस्लिम महिलाओं को हिजाब और सिक्खों को पगड़ी पहनने की अनुमति है। इसी को लेकर शुरू हुए विवाद में आज नया मोड़ आया है। कंपनी ने कर्मचारियों के लिए पूरी तरह नई इन-स्टोर ड्रेस और ग्रूमिंग कोड जारी कर दिया है, जिसमें बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, मंगलसूत्र जैसे सभी हिंदू धार्मिक प्रतीकों पर अब कोई रोक-टोक नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर #BoycottLenskart ट्रेंड जारी है और कई स्टोर्स पर लोग जाकर कर्मचारियों को तिलक लगाते हुए दिख रहे हैं।

क्या थी विवाद की जड़?

यह पूरा विवाद एक वायरल स्क्रीनशॉट से शुरू हुआ, जिसमें लेंसकार्ट की पुरानी स्टाफ यूनिफॉर्म और ग्रूमिंग गाइड में स्टाफ को हिजाब और पगड़ी पहनने को इजाज़त तो थी, लेकिन तिलक, बिंदी और कलावा पर रोक लगाई गई थी। हालाँकि, इस दस्तावेज़ को “आउटडेटेड” बताते हुए कंपनी ने फरवरी 2026 में ही इसमें करेक्शन कर लिया था, लेकिन फोटो वायरल होने के बाद देशभर में इसको लेकर भारी आक्रोश फैल गया।

बजरंग दल की प्रतिक्रिया

खबर फैलने के बाद बजरंग दल के कई सदस्य उसी मुंबई वाले लेंसकार्ट के शोरूम पहुंचे और वहां जाकर स्टाफ को तिलक लगाया। साथ ही, मौजूद लोगों से बातचीत और समझाइश भी की।

क्या कहना रहा स्टाफ का।

लेकिन इसके बाद भी कई कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें तिलक और कलावा जैसी चीज़ों पर बॉस की तरफ से परेशानियाँ झेलनी पड़ती है। कई पूर्व कर्मचारियों ने यहाँ तक दावा किया कि तिलक लगाने, कलावा बाँधने या शिखा न हटाने पर उन्हें नौकरी तक छोडनी पड़ गयी थी।

सोशल मीडिया पर एक विडियो वायरल जा रहा है जिसमें लेंसकार्ट के एक शोरूम में एक कर्मचारी ने मैनेजर के डर से अपनी टेबल के नीचे ही अपना एक छोटा सा मंदिर बना रखा है। टेबल के नीचे पैर रखने वाली जगह पर भगवान की एक तस्वीर लगा रखी है। जब बजरंग दल के लोगों ने इसे देखा, तो तस्वीर को वहां से निकलवाया और उसे एक ऊंची और साफ़ जगह पर रखने को कहा।

सोशल मीडिया पर आक्रोश और प्रदर्शन

विवाद के बाद कई वीडियो वायरल हुए, जिनमें लोग लेंसकार्ट स्टोर्स में जाकर कर्मचारियों को तिलक लगाते और कलावा बांधते दिख रहे हैं। मुंबई में भाजपा नेता नाजिया खान समेत हिंदू संगठनों के सदस्यों ने स्टोर पर पहुंचकर यह प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर चश्मा तोड़ने या फेंकने के वीडियो भी सामने आए।

CEO पीयूष बंसल की सफाई और माफी

इसके बाद लेंसकार्ट के फाउंडर और सीईओ पीयूष बंसल ने खुद सोशल मीडिया पर एक विडियो जारी कर कहा कि जो डॉक्यूमेंट की फोटो वायरल हो रही है, वो बहुत पुराना है और इसमें “भाषा की गलती” रह गई थी। बंसल ने साफ किया कि कंपनी किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक पर रोक नहीं लगाती। लिखा कि ये प्रतीक हमारे कर्मचारियों की पहचान का हिस्सा है।

नई पॉलिसी में क्या बदलाव हुआ?

विवाद उठने के बाद कंपनी ने 18-19 अप्रैल को नया ड्रेस कोड जारी किया। इस नए ड्रेस कोड में साफ लिखा गया है कि ऑफिस में बिंदी, तिलक, सिंदूर, कलावा, कड़ा, मंगलसूत्र, हिजाब, टर्बन सहित सभी धार्मिक प्रतीक पहनने की पूरी छूट है। नई गाइडलाइंस में लिखा है- “ये हमारे कर्मचारियों की पहचान का हिस्सा हैं।” कंपनी ने इसे “We Heard You” लाइन के साथ जारी किया।

कंपनी पर पड़ा असर

विवाद के बाद सोशल मीडिया पर “#BoycottLenskart” ट्रेंड करने लग गया। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, विवाद उठने के बाद लेंसकार्ट को मार्केट में करीब 4500 करोड़ रुपये का नुकसान झेलना पड़ा। हालांकि कंपनी ने इस आंकड़े की पुष्टि नहीं की। लोग लेंसकार्ट को बॉयकॉट करने की अपील कर रहे हैं। ये अपील अभी भी तेजी से फैल रही है और कई लोग अब लेंसकार्ट से चश्मा न खरीदने और शोरूम के सामने चश्मे तोड़ने जैसे विडियो बना रहे हैं।

बिज़नेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि कार्यस्थल पर धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान करना जरूरी है, बशर्ते वह काम में बाधा न डाले। इस विवाद से एक बार फिर कॉरपोरेट कंपनियों की ड्रेस कोड पॉलिसी पर सवाल उठने लग गए हैं। लेंसकार्ट ने हालांकि नई पॉलिसी जारी कर लॉस कण्ट्रोल करने की कोशिश की है, लेकिन सोशल मीडिया पर आक्रोश अभी थम नहीं रहा है और बॉयकॉट अभी भी ट्रेंड में है।


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