मकर संक्रांति 2026: सूर्य की चमक से इन राशियों के जीवन पर पड़ेगा प्रभाव! जानिए इस दिन क्या करें और क्या नहीं

Makar Sankranti- What to do and what not: मकर संक्रांति एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो सूर्य देव के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक है। यह फसल उत्सव, नई शुरुआत, सूर्य उपासना और दान-पुण्य का पावन अवसर है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 जनवरी (बुधवार) को मनाई जाएगी, क्योंकि सूर्य दोपहर लगभग 3:13 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे। पुण्य काल दोपहर 3:13 बजे से शाम तक रहेगा, और महापुण्य काल भी इसी दौरान होगा। (कुछ जगह पर इसी दिन एकादशी का संयोग के कारण थोड़ी दुविधा है, लेकिन मुख्य रूप से 14 जनवरी ही शुभ मानी जा रही है।)
सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ ही मलमास भी ख़त्म हो जायेगा और मांगलिक कार्यों का रास्ता खुल जायेगा।
धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति का दिन बहुत ही शुभ माना जाता है और इस दिन दान, पूजा और कर्म आदि करने का विशेष विधान है। माना जाता है कि इस दिन दान करने से उसका फल कई गुना ज्यादा मिलता है।
मकर संक्रांति पर क्या करें? (उपाय, दान और पूजा विधि)
यह दिन सूर्य देव की कृपा प्राप्त करने, पापों से मुक्ति और पुण्य कमाने का सर्वोत्तम अवसर है। इस दिन ग्रहों की शांति और पुण्य प्राप्ति के लिए ये काम करें :-
1. स्नान-दान: सुबह जल्दी उठकर पवित्र नदी (या घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर) में स्नान करें। पानी में काले तिल मिलाकर स्नान करना भी विशेष शुभ कहा गया है।
2. सूर्य अर्घ्य: तांबे के लोटे में जल लें, उसमें लाल फूल, अक्षत (चावल), गुड़, लाल चंदन मिलाकर सूर्य को अर्घ्य दें। मंत्र जपें: ॐ सूर्याय नमः या ॐ घृणिः सूर्याय नमः।
3. दान-पुण्य: तिल, गुड़, कंबल, गर्म वस्त्र, उड़द दाल, खिचड़ी, अनाज आदि दान करें। गरीबों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी है। (एकादशी संयोग होने पर तिल-गुड़ आधारित दान, कई स्थानों पर एकादशी को चावल नहीं बनाया जाता)
4. पूजा और भोग: घर के मंदिर में सूर्य देव की पूजा करें। तिल-गुड़ से बने लड्डू या व्यंजन बनाकर भोग लगाएं और परिवार में बांटें।
5. अन्य कर्म: पतंग उड़ाना तो होता ही है, इसके अलावा परिवार के साथ उत्सव मनाना, झगड़े से बचना और सकारात्मक सोच भी रखना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन में सोना वर्जित माना जाता है।
6. विशेष उपाय: सूर्य जब मकर राशि से गोचर करता है, तो मकर राशि का स्वामी होने के कारण शनि के प्रभाव में परिवर्तन आ जाता है। इसलिए इस दिन सूर्य और शनि के मंत्र का जाप करना शनि दोष निवारण के लिए उपयुक्त एवं विशेष फलदायक है।
मकर संक्रांति का धनु, मकर और कर्क राशि पर प्रभाव
सूर्य का मकर राशि में गोचर होने से मुख्य रूप से तीन राशियों पर प्रभाव पड़ता है- धनु, मकर और कर्क। सूर्य धनु से बाहर निकलते हैं, मकर में प्रवेश करते हैं और कर्क पर सूर्य की पूर्ण दृष्टि पड़ती है। शनि की राशि मकर में सूर्य के गोचर से अनुशासन, कर्म और उत्तरदायित्व बढ़ाता है। इन राशियों पर पड़ने वाला सूर्य का प्रभाव इस प्रकार है:
धनु राशि: सूर्य धनु से निकल रहा है, इसलिए भाग्य में मजबूती आएगी। ज्ञान वापस सामान्य स्तर पर आएगा, और ज्ञान अर्जन में मन लगेगा। पीले कपड़े, चने की दाल, हल्दी या धार्मिक किताबें दान करें। करियर और यात्राओं में लाभ मिलेंगे। जीवन नए कार्यों में सकारात्मक बदलाव की तरफ बढेगा।
मकर राशि: सूर्य शनि की राशि में प्रवेश कर रहा है, इसलिए इस गोचर को कई ज्योतिषी बहुत ज्यादा शुभ फलदायक नहीं मानते हैं। लेकिन सूर्य का मकर में गोचर आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा और कर्म क्षेत्र में उन्नति देता है। गहन विचार, शोध और गहराई वाले कार्यों में रुचि बढती है। काले तिल, उड़द दाल, कंबल या जूते-चप्पल दान करें। करियर में प्रगति थोड़ी धीरे होगी, लेकिन बड़ी होगी।
कर्क राशि: मकर में गोचर के दौरान सूर्य की पूर्ण दृष्टि कर्क राशि पर पड़ती है, और कर्क चन्द्रमा की राशि है। इसलिए इससे रिश्तों, साझेदारी और वैवाहिक जीवन पर प्रभाव पड़ेगा, और इनमें विशेष प्रगति और सुख प्राप्त होगा। स्वास्थ्य और धन दोनों में सुधार संभव है। चावल, दूध, सफेद मिठाई या चांदी का दान करें। पारिवारिक कलह कम होगी।
यह त्योहार सूर्य की ऊर्जा से जीवन में प्रकाश और समृद्धि लाता है। शुभ मुहूर्त में पूजा-दान करें और सकारात्मक रहें। सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं
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