ममता कुलकर्णी हुई किन्नर अखाड़े से बाहर, अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर पर तीखी टिप्पणी पड़ी भारी!

Mamta Kulkarni Expelled from Kinnar Akhada amid Avimukteshwaranand Controversy:
महाकुंभ के दौरान धार्मिक विवादों से सुर्ख़ियों में आई पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने बाहर निकाल दिया है। अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने एक वीडियो जारी कर इसकी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि पदाधिकारियों की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। अब से ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर नहीं है और उनका अखाड़े से कोई संबंध नहीं है।
ममता कुलकर्णी को पिछले साल 23 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ में किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया था, और उन्हें यामाई ममता नंद गिरी नाम दिया गया था। लेकिन हाल ही में 25 जनवरी को उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर तीखी टिप्पणियां कीं। ममता ने कहा कि "10 में से 9 महामंडलेश्वर और तथाकथित शंकराचार्य झूठे हैं और उन्हें शून्य ज्ञान है।" उन्होंने अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से भी उनके शंकराचार्य पद को लेकर 2 सवाल उठाये।
पहला सवाल - "उन्हें शंकराचार्य किसने बनाया?"
दूसरा सवाल – लाखों की भीड़ में स्नान करने के लिए रथ पर क्यों चले?
ममता ने अविमुक्तेश्वरानंद की आलोचना की और कहा कि उनकी वजह से ही उनके शिष्यों को मार झेलनी पड़ी। ममता ने अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर कहा कि उन्हें अहंकार हो गया है। कहा कि “सिर्फ चार वेदों को कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता। उनमें काफी अहंकार है, और आत्मज्ञान शून्य है।”
ममता ने कहा कि गुरु वो होता है, जो जिम्मेदार रहे पर उनके अहंकार और जिद की वजह से शिष्यों को नुकसान हुआ है।
अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर इस बयानबाजी की वजह से ममता कुलकर्णी और किन्नर अखाड़े के बीच असंतोष बढ़ गया, जिसके बाद अखाड़े की प्रमुख और अन्य पदाधिकारियों ने बैठक करके ममता कुलकर्णी को अखाड़े से बाहर करने का फैसला लिया।
अखाड़े की प्रमुख लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि अखाड़ा किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहता। उन्होंने मौनी अमावस्या पर बटुक ब्राह्मणों के साथ हुई मारपीट पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अखाड़ा महिलाओं, पुरुषों और किन्नरों का सम्मान करता है, लेकिन संगठनात्मक मर्यादाओं का पालन करना जरूरी है।
यह घटना महाकुंभ के दौरान चल रहे शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच शुरू हुए विवाद से जुड़ी है, जो अब धार्मिक नेतृत्व पर सवालों का रूप ले चुकी है। ममता कुलकर्णी की इस टिप्पणी ने संत समाज में बहस छेड़ दी है।
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