कांग्रेस को यूपी में बड़ा झटका! नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी छोड़ी, 73 साथी भी गए - बोले "अब जमीन पर काम करना चाहता हूँ"

Nasimuddin Siddiqui Resigned from Congress: उत्तर प्रदेश की राजनीति में आज एक बड़ी हलचल शुरू हो गयी, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया। शनिवार को सिद्दीकी ने कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता त्याग दी और पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया। इतना ही नहीं, उनके साथ 73 अन्य नेता भी कांग्रेस छोड़ने का ऐलान कर चुके हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के कार्यकर्ता शामिल हैं। इस अचानक मिले इस्तीफे से कांग्रेस और सियासी गलियारों में कई सवाल उठने लगे हैं, खासकर तब जब पार्टी राज्य में अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ये बदलाव कांग्रेस को बहुत भारी लग रहा है क्योंकि कुछ ही समय में पंचायत के चुनाव होने वाले हैं और विधानसभा चुनाव भी नज़दीक आ रहे हैं।
सिद्दीकी ने अपना इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, यूपी प्रभारी अविनाश पांडे और प्रदेश अध्यक्ष अजय राय को भेजा है। पत्र में उन्होंने लिखा कि वे अपरिहार्य कारणों से पार्टी की सदस्यता और समस्त दायित्वों से इस्तीफ़ा दे रहे हैं।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी यूपी राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वे बहुजन समाज पार्टी (BSP) में लंबे समय तक सक्रिय रहे और मायावती सरकार में मंत्री पद संभाला। 2017 में एक वायरल ऑडियो क्लिप और मतभेदों के चलते बीएसपी से निकल गए, जिसके बाद उन्होंने कांग्रेस पार्टी जॉइन की। यहां उन्हें यूपी कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली और उन्होंने मुस्लिम समुदाय में पार्टी में पार्टी का पक्ष मज़बूत करने पर काम किया था।
इस्तीफे के बाद सिद्दीकी ने कहा, "मुझे किसी से कोई नाराज़गी नहीं है। मैं ज़मीनी स्तर का कार्यकर्ता हूँ। बीते 8 सालों में मैं ज़मीनी स्तर पर काम नहीं कर सका, लेकिन अब करना चाहता हूँ। इसलिए पार्टी छोड़ रहा हूँ।"
उन्होंने आगे की योजना पर फ़िलहाल कोई बात नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में अटकलें हैं कि वे नई सियासी राह चुन सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय उनके आवास पर जाकर बात करने वाले हैं। इस घटना से कांग्रेस की यूपी इकाई कमजोर हो सकती है, और लोकसभा चुनावों से पहले यह बड़ा नुकसान साबित हो सकता है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि संगठन को मजबूत करने के प्रयास जारी रहेंगे।
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