जंतर-मंतर हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्त! सुनवाई में दिए 4 बड़े आदेश, नाबालिग प्रदर्शनकारी तुरंत होंगे रिहा

Supreme Court on Jantar Mantar Protest Violence: जंतर मंतर पर पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने छात्रों और पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि छात्रों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और प्रदर्शन करना उनका संवैधानिक अधिकार है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन में ज़रुरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों पर कानूनन कड़ी कार्रवाई होगी।
प्रदर्शन को लेकर दी गयी दलील
20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) से जुड़े छात्रों के प्रदर्शन के दौरान जब प्रदर्शनकारियों का जत्था संसद की तरफ बढ़ता हुआ लगा, तो पुलिस ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया था। इस दौरान प्रदर्शनकारी और पुलिस, दोनों ही काफी घायल हो गए थे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सभी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का पूरा हक़ है, लेकिन कानून तोड़ने वालों को सजा मिलनी चाहिए।
कोर्ट ने क्या कहा
बेंच ने कहा कि इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच होने की ज़रुरत है। साथ ही, 2018 के पुलिस कार्रवाई को लेकर दिए गए दिशा-निर्देशों को भी अपडेट करने का समय आ गया है ताकि प्रदर्शन शुरू होते ही तुरंत प्रोटोकॉल लागू किया जा सके।
क्या रहे कोर्ट के आदेश
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले में 4 बड़े निर्देश दिए हैं।
- 18 साल से कम उम्र के ऐसे प्रदर्शनकारी, जिनका कोई भी पुराना अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
- प्रदर्शन के दौरान जिन भी लोगों ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, उनके खिलाफ निष्पक्ष जाँच एवं जवाबदेही तय करते हुए कानूनन कार्रवाई की जाएगी।
- प्रदर्शन से जुड़े सभी सीसीटीवी, ड्रोन रिकॉर्डिंग और अन्य सभी डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखा जाए।
- इसके अलावा दिल्ली समेत आठ राज्यों से प्रदर्शन को लेकर जवाब मांगा गया है।
प्रदर्शन में हिंसा के मामले में अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।
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