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Dabur के प्रोडक्ट्स पर FSSAI ने लगाया बैन! ‘100% Pure’ प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक

Dabur के प्रोडक्ट्स पर FSSAI ने लगाया बैन! ‘100% Pure’ प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक
स्वास्थ्य
04 Aug 2026, 02:23 pm
रिपोर्टर : Dushyant

FSSAI Action on 100% Pure Dabur Products: भारत में खाने-पीने के सामान की क्वालिटी कण्ट्रोल और सुरक्षा की निगरानी करने वाले FSSAI ने डाबर इंडिया लिमिटेड को उसके कई प्रोडक्ट्स की बिक्री को तुरंत रोकने का आदेश दिया है। यह आदेश डाबर के उन सभी प्रोडक्ट्स के लिए है, जिनके लेबल पर कंपनी ने ‘100% नेचुरल’, ‘100% प्योर’, ‘100% ऑर्गेनिक’ जैसे दावे किये हैं। इनमें शहद (Honey), गाय का घी (Cow Ghee), एप्पल साइडर विनेगर (Apple Cider Vinegar), वर्जिन कोकोनट ऑयल (Virgin Coconut Oil), तिल का तेल (Sesame Oil), नारियल पानी (Coconut Water) और कोकोनट मिल्क (Coconut Milk) शामिल हैं।

100% के दावे गुमराह करते हैं – FSSAI

FSSAI ने सोमवार को सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी कंपनी द्वारा बेचे जा रहे प्रोडक्ट्स पर 100% शुद्ध, 100% नेचुरल जैसे दावे करना ग्राहकों को गुमराह करता है। नियमों के मुताबिक, किसी भी खाद्य पदार्थ पर इस तरह से दावे सच और लैब टेस्टिंग रिजल्ट पर आधारित होने चाहिए। किन्तु ये अस्पष्ट, भ्रामक और बिना सबूतों के होते हैं। ये दावे खाद्य सुरक्षा और मानक (विज्ञापन एवं दावे) विनियम, 2018 का उल्लंघन करते हैं।

बिना अप्रूवल ही लगाया ‘जैविक भारत’ लोगो

FSSAI रेगुलेटर ने यह भी पाया कि डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर और डाबर ऑर्गेनिक हनी की पैकेजिंग पर ‘जैविक भारत’ का लोगो लगा था। डाबर ने यह लोगो FSSAI से वैध ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन लिए बिना ही लगा लिया था। यह भी खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा होममेड कोकोनट मिल्क पर ‘100% प्योरिटी’ का दावा पाया गया, जबकि Compund foods (मिश्रित खाद्य पदार्थों) पर ऐसा दावा नहीं किया जा सकता।

पहले भी मिला था डाबर को नोटिस

FSSAI ने पहले भी कंपनी को ऐसे भ्रामक दावे बंद करने का नोटिस दिया था, लेकिन कंपनी ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। अब डाबर को इन प्रोडक्ट्स की बिक्री तुरंत रोकने और 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट जमा कराने का नोटिस मिला है। साथ ही, ऐसे लेबल्स और पैकेजिंग को भी बंद करने का आदेश दिया है।

FSSAI का कहना है कि ‘100%’ जैसे शब्दों की कोई स्पष्ट परिभाषा नियमों में नहीं है, इसलिए इनका इस्तेमाल करना आम लोगों को भ्रमित कर सकता है। फ़ूड प्रोडक्ट्स को लेकर किसी भी तरह का दावा करने से पहले उसका वैज्ञानिक सबूत और स्पष्टता जरूरी है।


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