होम/international/foreign-media-reports-on-cjp-protest-in-delhi-india

कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर क्या छाप रहा विदेशी मीडिया? CJP प्रोटेस्ट में इतनी दिलचस्पी क्यों?

कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन पर क्या छाप रहा विदेशी मीडिया? CJP प्रोटेस्ट में इतनी दिलचस्पी क्यों?
अंतरराष्ट्रीय
22 Jul 2026, 03:56 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

कॉक्रोच जनता पार्टी यानी CJP के संसद मार्च और प्रदर्शन की गूंज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही बल्कि इसकी आवाज़ लंदन, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन तक पहुंच चुकी है। ब्लूमबर्ग, द गार्जियन, द न्यूयॉर्क टाइम्स, BBC और रॉयटर्स जैसे अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान इस आंदोलन को हाल के सालों में मोदी सरकार के खिलाफ सबसे बड़े जन-आंदोलनों में से एक बता रहे हैं। उनकी रिपोर्ट में इसे खास तौर पर Gen-Z यानी युवा पीढ़ी के विरोध प्रदर्शन के रूप में पेश किया जा रहा है।

खबरों में सोनम वांगचुक को सबसे ज्यादा अहमियत

विदेशी मीडिया की रिपोर्टिंग का सबसे बड़ा फोकस रहा है सोनम वांगचुक को भारत के सबसे बड़े एक्टिविस्ट और इंजीनियर के रूप में दिखाना। उनका भूख हड़ताल पर बैठना, पुलिस द्वारा उन्हें धरना स्थल से उठाना। इसके साथ ही कॉक्रोच जनता पार्टी का संसद मार्च, पुलिस की कार्रवाई, उन पर आंसू गैस का इस्तेमाल इन अखबारों और पोर्ट्ल्स की हेडलाइन बना है।

रॉयटर्स, BBC और द गार्जियन ने प्रदर्शनकारियों के साथ हुई झड़पों, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और सोनम वांगचुक समेत कई प्रदर्शनकारियों को हटाने की घटनाओं को प्रमुखता से प्रकाशित किया है।

पीएम मोदी की चुनौती बना दिया CJP प्रोटेस्ट को

न्यूयॉर्क टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि पीएम मोदी की प्रतिक्रिया अब तक उनकी उस दशक पुरानी नीति के अनुरूप ही रही है कि उनके मंत्री जनता के दबाव के प्रति जवाबदेह नहीं हैं। लेकिन विरोध प्रदर्शनों का आकार और तीव्रता यह संकेत दे सकती है कि उनकी सत्तारूढ़ पार्टी ने भारत के युवाओं के तीव्र आक्रोश को कम करके आंका है,खासकर पड़ोसी देशों बांग्लादेश और नेपाल में हाल ही में हुए छात्र आंदोलनों के बाद, जिन्होंने सरकारों को गिरा दिया था। न्यूयॉर्क टाइम्स ने ये भी लिखा कि एक मजबूत नेता के रूप में पीएम मोदी की छवि में भी दरारें दिखाई देने लगी हैं।

CJP को ना झुकने वाली पार्टी करार दिया

उधर द गार्जियन ने लिखा कि सेंट्रल दिल्ली में हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए और इसे मोदी सरकार के खिलाफ अभूतपूर्व असहमति की अभिव्यक्ति बताया। अखबार ने यह भी लिखा कि प्रदर्शनकारियों का संदेश साफ है—अब झुकने का कोई सवाल नहीं है।

‘पीएम को CJP से अपने लिए चिंता करनी चाहिए’

वहीं ब्लूमबर्ग ने सवाल उठाया—"प्रधानमंत्री मोदी को CJP से चिंता क्यों करनी चाहिए?" रिपोर्ट में आंदोलन को सरकार के लिए एक राजनीतिक चुनौती के तौर पर पेश किया गया।

इतना ही नहीं, विदेशी मीडिया ने CJP के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक किए जाने और इंटरनेट शटडाउन जैसे कदमों को भी प्रमुखता से उठाया। कई रिपोर्टों में इन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देखा गया।

भारत की छवि बिगाड़ने पर तुले रहता है विदेशी मीडिया

आनी ये वो विदेशी मीडिया संस्थान हैं जो भारत की छवि को बिगाड़ने और गिराने की कोई कसर नहीं छोड़ते थे। ये वही द गार्जियन है जिसने बीबीसी की डॉक्यूमेंट्री पर कार्रवाई और भारत में प्रेस की आजादी की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। जिसका नाम था India invokes emergency laws to ban BBC Modi documentary. जिसे भारत सरकार ने सरकार ने खारिज किया और BBC डॉक्यूमेंट्री को पक्षपातपूर्ण बताया था।

वहीं न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट ने Wirecard–Xiaomi–India से जुड़ी रिपोर्ट्स और 2023 में चीन-प्रचार नेटवर्क पर रिपोर्ट छापी थी, इसे भी भारत सरकार ने खारिज किया था।

अब सवाल ये कि क्या विदेशी मीडिया भारत की राजनीति को निष्पक्ष तरीके से दिखा रहा है, या फिर अपने नजरिए से एक खास नैरेटिव गढ़ रहा है? और क्या इस तरह की अंतरराष्ट्रीय कवरेज भारत की घरेलू राजनीति को प्रभावित कर सकती है?

ये भी पढ़ें- क्या CJP का साथ देने आ रहे पंजाब के किसान? अमेरिका के साथ ट्रेड डील से क्या है नुकसान?


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.