होटल क्लार्क्स आमेर पर लटकी तलवार, 34 साल पुराने विवाद में कोर्ट ने सील की दी चेतावनी

जयपुर के लेबर कोर्ट ने 34 सालों से अटके चल रहे एक विवाद में क्लार्क्स आमेर होटल को सील करने की चेतावनी दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि होटल प्रबंधन या तो 8 जून तक अपने पूर्व कर्मचारी को 6.25 लाख रुपये का भुगतान करे, अन्यथा कोर्ट होटल के खिलाफ कुर्की वारंट जारी कर होटल को सीज करने की कार्रवाई करेगा।
दरअसल, यह मामला होटल के एक पूर्व कर्मचारी जगदीश से जुड़ा है, जिसे मार्च 1992 में होटल ने नौकरी से निकाल दिया था। जगदीश ने इस कार्रवाई को गलत बताते हुए अदालत में चुनौती दी। लम्बे समय तक केस चलने के बाद 19 अक्टूबर 2015 को लेबर कोर्ट ने होटल को दोषी ठहराते हुए कर्मचारी को वापस नौकरी पर रखने और बकाया वेतन और भत्ते समेत अन्य सभी लाभ देने के आदेश दिए थे। कोर्ट ने मार्च 1992 से लेकर मई 2016 तक के पूरे वेतन भत्ते देने का आदेश दिया था।
लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद भी होटल प्रबंधन ने न तो कर्मचारी को वापस नौकरी पर लिया और न ही कोई धनराशि दी। इसके चलते जगदीश ने फिर से कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके क्रम में कोर्ट ने होटल को नोटिस जारी किया। होटल क्लार्क्स आमेर ने इस पर 25 मई को अपना जवाब पेश किया, जिसे कोर्ट ने मानने से इनकार कर दिया।
जयपुर के लेबर कोर्ट-1 के जज दिनेश गुप्ता ने मामले में फैसला सुनाते हुए होटल को आदेश दिया कर्मचारी जगदीश की मांग रकम 24.25 लाख रुपये की एक चौथाई राशि 6 लाख रुपये और 25 हज़ार हर्जाने के 8 जून तक उनके खाते में जमा करवाए या फिर कोर्ट में डीडी पेश करे। अगर 8 जून तक होटल ऐसा नहीं करता है, तो कोर्ट होटल की खिलाफ कुर्की वारंट जारी कर होटल को सीज़ करने की कार्रवाई करेगा।
होटल प्रबंधन ने मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, लेकिन अब तक उसे किसी प्रकार की स्थगन राहत (स्टे) नहीं मिली है।
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