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दीनदयाल उपाध्याय के लिए विकास का मतलब अंतिम व्यक्ति का उत्थान: निंबाराम

दीनदयाल उपाध्याय के लिए विकास का मतलब अंतिम व्यक्ति का उत्थान: निंबाराम
जयपुर
24 Sept 2026, 06:01 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

जयपुर। जयपुर में ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय: एकात्म मानवदर्शन एवं भारतीय ज्ञान परंपरा’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक शोध संगोष्ठी का मंगलवार को समापन हुआ। समापन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों और उनके सामाजिक दृष्टिकोण पर बात रखी।

निंबाराम ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय की कथनी और करनी में अंतर नहीं था। उन्होंने एकात्म मानवदर्शन के जरिए समाज के सभी वर्गों के विकास का रास्ता बताया। उनके मुताबिक विकास का असली मतलब सिर्फ आर्थिक तरक्की नहीं, बल्कि समाज के उस व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है, जो सबसे पीछे है।

अंत्योदय को विकास का आधार बताया

निंबाराम ने कहा कि दीनदयाल उपाध्याय के लिए अंत्योदय यानी समाज के अंतिम व्यक्ति की उन्नति, विकसित भारत की सोच का अहम आधार थी। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें पूरे समाज की भूमिका भी जरूरी है।

उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय की आदर्श गांव की कल्पना का भी जिक्र किया। निंबाराम ने कहा कि गांव के विकास के लिए शिक्षा, संस्कार, आपसी सहयोग और सामाजिक समरसता को साथ लेकर चलना जरूरी है।

भारतीय ज्ञान परंपरा पर भी चर्चा

दो दिवसीय संगोष्ठी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानवदर्शन के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। समापन सत्र में उनके विचारों की मौजूदा सामाजिक संदर्भों में प्रासंगिकता पर भी विचार रखा गया।


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