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गुरु तेग बहादुर का बलिदान औरंगजेब के मंसूबों पर पड़ा भारी: डॉ. कृष्ण गोपाल

गुरु तेग बहादुर का बलिदान औरंगजेब के मंसूबों पर पड़ा भारी: डॉ. कृष्ण गोपाल
जयपुर
22 Sept 2026, 02:28 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि औरंगजेब की सोच थी कि भारतीयों को कष्ट और यातनाएं देकर उनका धैर्य तोड़ा जा सकता है और उन्हें धर्म छोड़ने के लिए मजबूर किया जा सकता है, लेकिन गुरु तेग बहादुर के बलिदान ने उसके सभी मंसूबों को विफल कर दिया।

डॉ. कृष्ण गोपाल सोमवार को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर में श्री गुरु गोविंदसिंह चेयर फॉर नेशनल इंटीग्रेशन एंड सिख स्टडीज तथा भारतीय अभ्युत्थान समिति, राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित व्याख्यान को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में जयपुर प्रांत सह संघचालक हेमंत सेठिया भी मौजूद रहे।

गुरु तेग बहादुर को कहा जाता है 'हिंद की चादर'

डॉ. कृष्ण गोपाल ने गुरु नानकदेव के जीवन और उनके भारत भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरु नानकदेव के प्रभाव से देशभर में अध्यात्म की एक लहर उठी, जो भारत का रक्षा कवच बनी। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गुरु हरगोविंद ने धर्म की रक्षा का संकल्प लिया और बाद में गुरु तेग बहादुर ने धर्म की रक्षा के लिए अपना आत्मबलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि इसी कारण गुरु तेग बहादुर को 'हिंद की चादर' कहा जाता है। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान केवल किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि धर्म और मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए था।

सामाजिक समरसता और एकता पर जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रूपिंदर सिंह ने गुरुजनों की शिक्षाओं को जीवन में आत्मसात करने का आह्वान किया। उन्होंने गुरु तेग बहादुर के करुणा और प्रेम के सिद्धांतों के माध्यम से सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करने पर जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि राजस्थान विश्वविद्यालय की कुलगुरु कल्पना कटेजा ने गुरु परंपरा को भारत की महान विरासत बताया। उन्होंने विश्व एकता के लिए गुरुजनों की शिक्षाओं के महत्व को रेखांकित किया।

कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' से हुई। इस दौरान गुरु तेग बहादुर के जीवन पर आधारित एक संक्षिप्त एनिमेटेड डॉक्यूमेंट्री भी प्रदर्शित की गई। कार्यक्रम के अंत में भारतीय अभ्युत्थान समिति के अध्यक्ष डॉ. रमेश चंद्र अग्रवाल ने अतिथियों और उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया।


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