नशे की बढ़ती पहुंच पर निंबाराम का बड़ा बयान, समाज जागरण पर दिया जोर

जयपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजस्थान क्षेत्र प्रचारक निंबाराम ने कहा कि नशे की समस्या अब सिर्फ बड़े शहरों या किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं रह गई है। छोटे कस्बों, ग्रामीण इलाकों और शिक्षण संस्थानों तक भी नशे की पहुंच चिंता का विषय है। इसका असर सिर्फ नशा करने वाले व्यक्ति पर नहीं, बल्कि उसके परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों पर भी पड़ता है। ऐसे में नशे के खिलाफ लड़ाई को सिर्फ किसी संगठन का अभियान नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बनाना होगा।
निंबाराम रविवार को जयपुर में डॉक्टर हेडगेवार स्मृति सेवा प्रन्यास की ओर से आयोजित ‘नशामुक्त परिवार, स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र’ विषयक नशा मुक्ति अभियान कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि नशामुक्ति की दिशा में यह सिर्फ शुरुआत है। अब इसे समाज के अलग-अलग वर्गों तक ले जाने के लिए एक व्यवस्थित योजना बनाकर काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ समाज ही मजबूत समाज बन सकता है। कुपोषण, शिक्षा और संस्कारों की कमी जैसी चुनौतियों के साथ नशा भी समाज के सामने एक बड़ी समस्या है।
छोटी आदत कब बन जाए लत, पता नहीं चलता
निंबाराम ने कहा कि कई बार नशे की शुरुआत बहुत छोटे स्तर पर होती है। व्यक्ति इसे सिर्फ प्रयोग या आदत समझता है, लेकिन धीरे-धीरे यही आदत लत में बदल सकती है। नशे की तलब उसके व्यवहार और पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने लगती है।
उन्होंने कहा कि आज नशे के तरीके भी बदल रहे हैं। पीने, सूंघने, लगाने और इंजेक्शन के जरिए नशा करने जैसे कई तरीके सामने आ रहे हैं। इसलिए खासकर युवाओं और किशोरों को नशे के अलग-अलग रूप और उनके नुकसान के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बड़े शहरों और उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ अब छोटे कस्बों और गांवों में भी नशे का असर दिखाई दे रहा है। इसे सिर्फ आज की समस्या मानने के बजाय आने वाली पीढ़ियों पर इसके असर को भी समझना होगा।
कार्यशाला में जैन संत उपाध्याय श्री 108 उर्जयन्तसागर जी महाराज ने कहा कि जरूरत सिर्फ नशामुक्त होने की नहीं, बल्कि नशे से पूरी तरह मुक्ति की है। उन्होंने कहा कि नशा सिर्फ किसी पदार्थ का नहीं होता, बल्कि ऐसी आदतें भी नशे का रूप ले सकती हैं जो व्यक्ति के चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व को नुकसान पहुंचाती हैं।
उन्होंने कहा कि देश का भविष्य युवाओं से तय होता है। यदि युवा सुरक्षित, अनुशासित, संकल्पित और संगठित रहें तो देश को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने डिप्रेशन और ओवरथिंकिंग को भी युवाओं में नशे की ओर बढ़ने के पीछे एक कारण बताया। उन्होंने कहा कि नशे से मुक्ति सिर्फ सरकार या किसी संगठन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की नैतिक जिम्मेदारी है। कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने और समाज के विभिन्न वर्गों को इससे जोड़ने के लिए अपने सुझाव भी रखे।
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