निर्जला एकादशी पर पुण्य के साथ परोपकार का अवसर, जयपुर में नगर निगम चला रहा ‘अमृत सेवा अभियान’

Jaipur: निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। ये ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को पड़ती है। ऐसे में गुरुवार को (आज) लोगों ने व्रत रखा है। मान्यताओं के मुताबिक इस दिन व्रत रखने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है। ये व्रत बिना अन्न और जल ग्रहण किए रखा जाता है, इसलिए इसे सबसे कठिन एकादशी व्रतों में गिना जाता है। इसलिए जयपुर में नगर निगम ने लोगों को राहत के लिए खास इंतजाम किए हैं।
जयपुर में नगर निगम का ‘अमृत सेवा अभियान’
जयपुर नगर निगम ने पूरे शहर में ‘अमृत सेवा अभियान’ के तहत जगह-जगह 108 सेवा स्टॉल लगाए हैं। इन स्टॉलों पर राहगीरों, मजदूरों, जरूरतमंद लोगों और आम नागरिकों को गर्मी से राहत देने के लिए ठंडा पानी, फलाहार, छाछ, शरबत, लस्सी और जूस उपलब्ध कराया जा रहा है।
नगर निगम के अधिकारी ओम कसेरा ने बताया कि ये अभियान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की जनकल्याणकारी सोच और नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता देने की भावना से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि उद्देश्य केवल निर्जला एकादशी को धार्मिक आस्था तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे सेवा और सामाजिक सहभागिता के अभियान के रूप में स्थापित करना है।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी
अभियान में सहयोग करने वाले नागरिकों, संस्थाओं और संगठनों के लिए रजिस्ट्रेशन का इंतजाम भी किया गया है। ऐसे लोग www.amritseva.in पर जाकर रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं। इसके अलावा नगर निगम की तरफ से जारी किए गए QR कोड को स्कैन करके भी रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।
108 स्टॉल लगाने के पीछे क्या है महत्व
अभियान के तहत 108 स्टॉल लगाने के पीछे सनातन परंपरा से जुड़ा विशेष महत्व बताया गया है। हिंदू परंपरा में 108 संख्या का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए 108 स्टॉल लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, यदि जरूरत पड़ी तो स्टॉलों की संख्या और भी बढ़ाई जा सकती है।
मानव सेवा और सामाजिक सहयोग पर जोर
नगर निगम ने आमजन, सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। अभियान के दौरान साफ-सफाई पर खास ध्यान दिया जा रहा है। सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
बता दें कि ये एकादशी बीती 24 जून, बुधवार शाम 6 बजकर 13 मिनट से शुरू हुई है। ये 25 जून, गुरुवार शाम 8 बजकर 10 मिनट पर समाप्त होगी। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, जो लोग पूरे साल की 24 एकादशियों का व्रत नहीं कर पाते, वे निर्जला एकादशी का व्रत रखकर सभी एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकते हैं। इस व्रत से भगवान विष्णु की विशेष कृपा मिलती है, पापों से मुक्ति मिलती है, पुण्य की प्राप्ति होती है, मन को शांति और संतोष मिलता है। इस दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व माना गया है।
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