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भरत तिवारी हत्या का आरोप जिस पुलिस अधिकारी पर, उसे मिली नई पोस्टिंग! माँ बोली - सरकार लीपापोती कर रही है

भरत तिवारी हत्या का आरोप जिस पुलिस अधिकारी पर, उसे मिली नई पोस्टिंग! माँ बोली - सरकार लीपापोती कर रही है
राष्ट्रीय
02 Jul 2026, 07:05 pm
रिपोर्टर : Dushyant

Bharat Tiwari Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी का कथित पुलिस एनकाउंटर एक मामला अभी तक शांत भी नहीं हुआ था कि इस मामले ने एक बार फिर से तूल पकड़ लिया है। इस बार विवाद उस पुलिस वाले को लेकर है, जिसके खिलाफ मामले में हत्या की एफआईआर दर्ज है, क्योंकि सरकार ने इस पुलिसवाले को दूसरे विभाग में पोस्टिंग भी दे दी है। मृतक के परिवार ने सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

क्या है भारत तिवारी हत्या का नया विवाद

यह मामला 17 जून 2026 का है, जब भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में पुलिस एनकाउंटर में भरत तिवारी की मौत हो गई थी। परिजनों ने इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए पुलिस अधिकारियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया। बाद में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि भरत के शरीर पर पांच गोलियां लगी थी। इसके बाद मामला और गंभीर हो गया।

मामला गरमाने के बाद सरकार ने एनकाउंटर से जुड़े सभी पुलिसवालों को लाइन हाजिर किया, जिनमें तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा भी शामिल थे। लेकिन कोई ठोस कार्रवाई होने से पहले ही विभाग ने उनकी जगह बदल दी। 1 जुलाई को बिहार सरकार ने पुलिस अफसरों की तबादला सूची जारी की, जिसमें राजेश कुमार शर्मा को मद्यनिषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (Prohibition and State Narcotics Control Bureau) में डीएसपी के पद पर तैनात कर दिया।

भरत की माँ ने लगाए सरकार पर आरोप

नई पोस्टिंग के बाद भरत तिवारी की मां आशा देवी ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार इस मामले में सिर्फ लीपापोती कर रही है। उनके बेटे की मौत के जिम्मेदार लोगों को सजा मिलने के बजाय नई जिम्मेदारी दे रहे हैं। हमें तबादला नहीं, उन दोषियों पर कार्रवाई चाहिए।

क्या कहते हैं सरकारी नियम और कानून

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, केवल FIR दर्ज होने से किसी सरकारी अधिकारी को दोषी नहीं माना जाता। अगर उसे निलंबित नहीं किया गया है, तो सरकार प्रशासनिक ज़रूरत के अनुसार उसे कहीं भी तैनात कर सकती है। हालांकि, जब किसी पुलिस अधिकारी पर हत्या जैसे गंभीर आरोप लगे हुए हों, इन सब के बीच उसका ऐसे बड़े और जिम्मेदार पद पर पोस्टिंग करना निष्पक्ष जांच और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।

फिलहाल मामले की जांच जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या पीड़ित परिवार को न्याय मिल पाता है।


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