होम/national/delhi-protest-viral-audio-youth-congress-leader-jantar-mantar-takhtapalat-claim

CJP प्रोटेस्ट की आड़ तख्तापलट की साजिश! यूथ कांग्रेस नेता का ऑडियो वायरल

राष्ट्रीय
10 Oct 2026, 05:19 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

दिल्ली जाम करेंगे... तख्तापलट करेंगे... प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेकर रहेंगे… आखिर ये किस तरह की क्रांति की भाषा है? संवैधानिक संस्थाओं पर उंगली उठाने वाले प्रदर्शनकारी किस मुंह से अपने आपको क्रांतिकारी बोल रहे हैं.,... क्या लोकतंत्र में विरोध के नाम पर देश को ठप करने और सत्ता पलटने की बातें करना जायज है?

दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो क्लिप ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव करण चौरसिया का है ऑडियो

‘जस्टिस मोर्चा’ नाम के एक व्हाट्स ग्रुप की बातचीत में प्रदर्शनकारियों को दिल्ली बुलाने, उनके ठहरने के इंतजाम करने और आंदोलन को बड़े स्तर पर सफल बनाने की बातें कही जा रही हैं। इसका ऑडियो भी सामने आया है जो यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव करण चौरसिया का है। उसने ही इस तरह प्रदर्शनकारियों को जंतर मंतर पर बुलाने की अपील की और तख्तापलट जैसी बात की।

साथ ही मोदी-अमित शाह और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की बात कर रहा था। अब सवाल ये है कि जो कांग्रेस छाती पीट-पीट कर लोकतंत्र की हत्या की बात करती है, उसका ही नेता इस तरह दिल्ली जाम करने और तख्तापलट जैसी बातें करके आखिर कौन सा लोकतंत्र बचा रहा है, क्योंकि पीएम मोदी को जनता ने चुना है और चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है। उसे जनता या कोई सरकार या कोई पार्टी नहीं चुनती।

क्या कहा है ऑडियो में

इस ऑडियो में करण चौरसिया कह रहा है कि "वक्त है क्रांति का, और इस वक्त लग्जरी नहीं देख सकते हैं..किसी साथी को रुकने-ठहरने की समस्या हो रही है....तो यूथ कांग्रेस के दफ्तर में टेंट लगावाया हुआ है, गद्दे-बिस्तर पड़े हैं.,..सभी क्रांतिकारी वहां आकर सो जाएं,,,,जंतर मंतर वहां से 800 मीटर की दूरी पर हैं...तो आप लोग आएं और क्रांति में शामिल हुए,,,,this is open invitation to all…"

आगे ऑडियो में ये भी कहा गया है कि "हमारे ग्रुप में कुछ IB के लोग हैं,,लोकल इंटेलिजेंस के लोग हैं,,,,जो डराने-धमकाने की बात कर रहे हैं ,,,वो लोग हमें जंतर मंतर पर जाने से रोकना चाहते हैं...अगर आप बोल रहे हैं,,,कि आपको डिटेन कर लिया गया है...आपके घर वालों को परेशान किया जा रहा है,...तो उसका आप विडियो भेजिए, वीडियोग्राफी करनी है....ये भी कहा है ऑडियो में कि सॉलिड मूवमेंट है...इसे सफल बनाना है..दिल्ली जाम करनी है...ज्ञानेश कुमार, नरेंद्र मोदी और अमित शाह सभी का इस्तीफा लेना है,...पूरी तरह से लड़ेंगे और प्रदर्शन करेंगे..डटे रहना है,,,तख्तापलट करना है..."

तख्तापलट करने का किया दावा

विरोध करना अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर अराजकता की भाषा बोलना किसी भी राजनीतिक दल की जिम्मेदारी पर सवाल खड़े करता है। इस ऑडियो में दिल्ली जाम करने और तख्तापलट जैसी बातें कही गई हैं, तो ये बेहद गंभीर मामला है।

भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार देता है। लेकिन इस अधिकार की आड़ में अगर कोई सार्वजनिक व्यवस्था ठप करने, लोगों को परेशान करने या संवैधानिक संस्थाओं को अस्थिर करने की बात करता है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए। और यहां सबसे बड़ा सवाल देश की संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा का है।

चुनाव आयोग हो, न्यायपालिका हो या कोई दूसरी संवैधानिक संस्था...उनके फैसलों की आलोचना कीजिए, सवाल पूछिए, विरोध दर्ज कराइए। लेकिन क्या किसी संस्था के प्रमुख का इस्तीफा मांगने के लिए ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जिससे देश की व्यवस्था को ही चुनौती मिलने लगे। लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता संविधान तय करता है, सड़क पर तख्तापलट के नारे नहीं।


इस लिंक को शेयर करें

ads

लेटेस्ट खबरें

ads
© 2026 Bharat Raftar. All rights reserved. Powered By Zentek.