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भारत पर मंडरा रहा एल नीनो का खतरा, 3 महीने पड़ेगा भयंकर सूखा, सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश

भारत पर मंडरा रहा एल नीनो का खतरा, 3 महीने पड़ेगा भयंकर सूखा, सरकार ने जारी किए दिशा-निर्देश
राष्ट्रीय
03 Jun 2026, 02:31 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

El Nino Alert: विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नीनो को लेकर बड़ी चेतावनी जारी की है। संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी के मुताबिक जून से अगस्त 2026 के बीच अल नीनो विकसित होने की 80 प्रतिशत संभावना है, जबकि नवंबर तक इसके बने रहने की संभावना 90 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ऐसे में भारत समेत दक्षिण एशिया के कई देशों में मानसून प्रभावित होने और सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बढ़ गया है।

WMO ने कहा है कि प्रशांत महासागर का पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जिससे वैश्विक तापमान और बारिश का पैटर्न प्रभावित होगा। इसके चलते कई क्षेत्रों में सूखा, हीटवेव और चरम मौसम की घटनाएं बढ़ सकती हैं।

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) पहले ही इस साल सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका जता चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2026 का मानसून पिछले 11 सालों में सबसे कमजोर मानसून साबित हो सकता है। मानसून सामान्य से करीब 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे कृषि, जल भंडारण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है।

जानकारों का कहना है कि अल नीनो आमतौर पर भारतीय मानसून को कमजोर करता है। ऐसे में जून से सितंबर के दौरान कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश दर्ज हो सकती है और सूखे जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

अगले तीन महीने क्यों अहम?

WMO के अनुसार मई-जुलाई से लेकर अगस्त तक अल नीनो के प्रभाव तेज होने की संभावना है। संस्था ने आगामी तीन महीनों में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान जताया है। भारत में भी कई क्षेत्रों में हीटवेव के दिनों की संख्या बढ़ सकती है और बारिश की मात्रा असंतुलित रह सकती है।

केंद्र सरकार भी सतर्क

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को जिला स्तर पर सूखा प्रबंधन और आपातकालीन योजनाएं सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। कृषि, जल संसाधन और ग्रामीण क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव को देखते हुए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

गौरतलब है कि भारत की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी मानसूनी बारिश पर निर्भर है। अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो धान, दालों और तिलहन जैसी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसका सीधा प्रभाव खाद्य महंगाई और ग्रामीण आय पर भी देखने को मिल सकता है।

फिलहाल मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अल नीनो का असर कितना गंभीर होगा, ये आने वाले हफ्तों में साफ होगा। हालांकि WMO की चेतावनी ने ये संकेत जरूर दे दिया है कि भारत को कमजोर मानसून, अधिक गर्मी और संभावित सूखे के जोखिम के लिए तैयार रहना होगा।

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