चुनाव आयोग में मतभेद? SIR और ECINet पर EC के 2 आयुक्तों की आपत्ति, चुनाव रद्द कराने की मांग उठा रहा विपक्ष

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के बीच मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद देश की सियासत गरमा गई है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले करीब 10 महीनों में दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के स्तर पर लिए जा रहे फैसलों को लेकर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision), वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने, Form-6 और चुनावी डेटा के डिजिटल प्रबंधन से बताया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों आयुक्तों ने कुछ फैसलों को लेकर प्रक्रिया, अधिकार और तकनीकी व्यवस्था पर सवाल उठाए। वहीं चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के आधार पर किसी अंदरूनी टूट या विवाद की बात को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि “जिस संवैधानिक संस्था में एक से ज्यादा सदस्य होते हैं, वहां लिखित नोट, सुझाव, सवाल और अलग-अलग राय अंदरूनी निर्णय प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक साल में लिए गए सभी फाइनल फैसले आयोग की सभी सदस्यों की सम्मति से हुए हैं।
14 बार क्या आपत्तियां उठाई गईं?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नवंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच संधू और जोशी ने अलग-अलग मौकों पर आयोग के फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर लिखित आपत्तियां दर्ज कीं। इनमें प्रमुख तौर पर—
-SIR और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया
-Form-6 में किए गए बदलाव
-ERONet/ECINet में मतदाता डेटा के नियंत्रण और एक्सेस
-राज्य स्तर के चुनाव अधिकारियों के अधिकार
-कुछ मामलों में फैसले लेने से पहले सभी सदस्यों को जानकारी और मंजूरी देने की प्रक्रिया
-पश्चिम बंगाल में SIR में हटाए गए मतदाताओं से जुड़े मामलों
-गोवा में पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने से जुड़े मुद्दे
Form-6 में बदलाव पर भी उठे सवाल
विवाद का एक अहम हिस्सा Form-6 है। यही फॉर्म नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होता है। Form-6 के नए डिजिटल संस्करण में SIR से जुड़ा एक घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। इसमें नए मतदाता से पूछा गया कि उसका नाम या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली SIR के दौरान तैयार मतदाता सूची में था या नहीं।
रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई में इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि Form-6 एक वैधानिक फॉर्म है और इसमें बदलाव के लिए Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन की जरूरत होगी। चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने भी इस आपत्ति से सहमति जताई थी। बाद में संधू ने इस बदलाव को हटाने की मांग भी की।
ECINet को लेकर भी असहमति
विवाद का दूसरा बड़ा मुद्दा चुनाव आयोग का नया डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet है। आयोग ने जनवरी 2026 में ECINet को अपने डिजिटल सिस्टम के एकीकृत प्लेटफॉर्म के तौर पर लॉन्च किया था।
संधू और जोशी ने मतदाता डेटा के केंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर काम करने वाले Electoral Registration Officers यानी EROs के डिजिटल एक्सेस को लेकर चिंता जताई।
दोनों आयुक्तों ने यह सवाल उठाया कि कानून के तहत मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों की है, उनके अधिकार तकनीकी सिस्टम के जरिए सीमित नहीं होने चाहिए। विवेक जोशी ने कथित तौर पर मतदाता डेटाबेस की सुरक्षा और एक्सेस को लेकर स्वतंत्र ऑडिट का सुझाव भी दिया था।
क्या SIR से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटे?
ये मुद्दा इसलिए भी अहम है क्योंकि SIR का विस्तार अब 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक हो चुका है। ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि इतने लोगों को स्थायी रूप से मतदान के अधिकार से बाहर कर दिया गया है। SIR प्रक्रिया में दावा-आपत्ति और अपील के जरिए नाम दोबारा शामिल कराने की व्यवस्था है।
पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान हटाए गए नामों को लेकर बड़ी संख्या में अपीलें हुई हैं। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 27.16 लाख हटाए गए मतदाताओं में से 22 लाख से ज्यादा ने नाम बहाल कराने के लिए अपील की है।
विपक्ष ने सरकार और चुनाव आयोग को घेरा
रिपोर्ट सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए 'वोट चोरी' को संविधान और भारतीय नागरिकों के खिलाफ अपराध बताया। उन्होंने BJP, RSS और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं, जिनका चुनाव आयोग ने अपनी प्रतिक्रिया में खंडन करते हुए कहा है कि उसके अंतिम फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।
केजरीवाल ने की चुनाव रद्द कर दोबारा कराने की मांग
AAP के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने SIR प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और हाल में हुए दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के चुनावों को रद्द कर दोबारा कराने की मांग की। केजरीवाल का दावा है कि SIR के दौरान 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए और पूरी प्रक्रिया अवैध है।
विपक्ष के दूसरे नेताओं ने भी उठाए सवाल
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने सुप्रीम कोर्ट से मामले का स्वत: संज्ञान लेने की मांग की। कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप से काम करना चाहिए। कई अन्य विपक्षी नेताओं ने भी CEC के खिलाफ कार्रवाई या SIR की समीक्षा की मांग की है।
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