CJP प्रोटेस्ट या सनातन धर्म का अपमान? कसाब और तिलक-कलावे की वायरल चैट

CJP Protest Viral Chat: तिलक लगाओ, कलावा बांधो, स्टन-गन और एयर-गन लेकर आओ और फिर खुद को बताओ कि फीलिंग आ रही है आतंकी कसाब वाली। आखिर ये कैसी मानसिकता है? ये कैसा विरोध प्रदर्शन है? और सबसे बड़ा सवाल कि क्या विरोध के नाम पर सनातन धर्म के प्रतीकों को इस तरह इस्तेमाल करना किस आधुनिकतावादी सोच का हिस्सा है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर एक कथित व्हाट्सऐप ग्रुप चैट वायरल होने का दावा किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह ग्रुप ‘Woman for Jantar Mantar Protest’ नाम से है।
स्टन गन, एयर गन, कलावा-तिलक लाने-लगाने का जिक्र
इस चैट को लेकर दावा है कि इसमें महिलाओं को प्रदर्शन में शामिल होने की तैयारी करने के साथ-साथ स्टन-गन, एयर-गन और हेलमेट जैसी चीजें लाने की बातें कही गई हैं। अगर ये संदेश असली हैं, तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर प्रदर्शन की तैयारी किस दिशा में जा रही है?
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे विचलित करने वाला दावा है तिलक, कलावा और कसाब का जिक्र, आखिर तिलक और कलावा किस बात के प्रतीक हैं? सनातन धर्म की आस्था के, फिर इन्हें हिंसा और डर पैदा करने वाली रणनीति से जोड़ने का क्या मतलब है?
और फिर कसाब वो अजमल कसाब जो 26/11 मुंबई आतंकी हमले का दोषी आतंकवादी था। जिसने ना जाने कितने भारतीयों की बेरहमी से हत्या कर दी। उस नाम को अपने प्रदर्शन की तैयारी में इस्तेमाल करना कोई मामूली बात नहीं है। अगर वायरल चैट में वास्तव में ऐसा कहा गया है, तो ये बेहद आपत्तिजनक है और इसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
हथियारनुमा उपकरण प्रदर्शन में क्यों?
लेकिन सवाल यहां सिर्फ सुरक्षा के इंतजामों का नहीं है। हर नागरिक को अपनी सुरक्षा की चिंता करने का अधिकार है। सवाल ये है कि क्या कथित तौर पर हथियारनुमा उपकरणों को जुटाने और धार्मिक प्रतीकों को किसी रणनीति से जोड़ने की बातें वास्तव में हुई हैं।
क्या विरोध के नाम पर सनातन धर्म के प्रतीकों का मजाक उड़ाना ही कथित सेक्यूलरवाद है? तिलक लगाना अपराध नहीं, कलावा पहनना अपराध नहीं और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना भी अपराध नहीं। लेकिन अगर किसी ने इन प्रतीकों को जानबूझकर आतंकी पहचान के साथ जोड़ने की कोशिश की है, तो उस पर सवाल उठने चाहिए।
और एक बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए कि लोकतंत्र में विरोध कीजिए, सरकार और चुनाव आयोग से सवाल पूछिए, लेकिन हिंसा की आशंका पैदा करने वाली किसी भी तैयारी को नॉर्मल बताकर नजरअंदाज मत कीजिए।
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