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Overtime Rules in India: तय समय से ज्यादा कंपनी ने आपसे काम कराया और पैसा नहीं दिया? जानिए कौन से कानून देते हैं आपको अधिकार

Overtime Rules in India: तय समय से ज्यादा कंपनी ने आपसे काम कराया और पैसा नहीं दिया? जानिए कौन से कानून देते हैं आपको अधिकार
राष्ट्रीय
03 Jun 2026, 11:10 am
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Overtime Rules in India: भारत में निजी कंपनियों, कॉर्पोरेट कार्यालयों, आईटी फर्मों और कारखानों में कर्मचारियों से तय समय से ज्यादा काम कराना आम बात हो गई है। हालांकि, भारतीय श्रम कानून साफ तौर पर बताते हैं कि निर्धारित समय से ज्यादा काम लेने पर कर्मचारियों को ओवरटाइम का भुगतान किया जाना अनिवार्य है। अगर किसी कर्मचारी से एक्स्ट्रा काम कराया जाता है और उसका भुगतान नहीं किया जाता, तो वह कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

निजी कार्यालयों और कंपनियों पर लागू होता है Shops and Establishments Act

अगर कोई कर्मचारी निजी कार्यालय, कॉर्पोरेट कंपनी, आईटी फर्म या दुकान में कार्यरत है, तो उस राज्य का दुकान एवं स्थापना अधिनियम (Shops and Establishments Act) लागू होता है। ज्यादातर राज्यों में कर्मचारियों के लिए प्रतिदिन 9 घंटे और प्रति सप्ताह 48 घंटे काम की सीमा निर्धारित है। अगर इससे ज्यादा समय तक काम कराया जाता है, तो कर्मचारी को उसके वेतन दर से दोगुना ओवरटाइम भुगतान पाने का कानूनी अधिकार होता है।

OSH Code 2020 में भी है ओवरटाइम का प्रावधान

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, 2020 (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code - OSH Code) ने कई पुराने श्रम कानूनों को जोड़ा है, जिनमें फैक्ट्री अधिनियम, 1948 भी शामिल है। इसके मुताबिक किसी भी कर्मचारी को सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अगर एक्स्ट्रा काम लिया जाता है, तो नियोक्ता को नियमित वेतन दर से दोगुना भुगतान करना अनिवार्य है।

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Wage Code 2019 क्या कहता है?

वेतन संहिता, 2019 (Wage Code 2019) कर्मचारियों को ये अधिकार देती है कि उन्हें उनके किए गए सभी कार्यों का भुगतान समय पर मिले। जानकारों के मुताबिक अगर कोई कंपनी तय वेतन या ओवरटाइम भुगतान रोकती है, तो इसे मजदूरी से जुड़ा उल्लंघन माना जा सकता है और कर्मचारी इसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।

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ओवरटाइम का पैसा नहीं मिले तो क्या करें?

अगर किसी कर्मचारी को अतिरिक्त काम का भुगतान नहीं मिल रहा है, तो उसे सबसे पहले अपने कार्य घंटों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना चाहिए। इसमें लॉग-इन और लॉग-आउट डेटा, ईमेल, मैसेज और दूसरे दस्तावेज शामिल हो सकते हैं।

इसके बाद कर्मचारी कंपनी के HR) या प्रबंधन को लिखित शिकायत दर्ज करा सकता है। अगर वहां समाधान नहीं मिलता, तो राज्य के श्रम विभाग, श्रम आयुक्त (Labour Commissioner) या श्रम न्यायालय (Labour Court) का रुख किया जा सकता है।

किन कर्मचारियों पर लागू नहीं हो सकते ये नियम?

श्रम कानूनों के जानकार बताते हैं कि कुछ मामलों में प्रबंधकीय (Managerial) और प्रशासनिक या सुपरवाइजरी (Supervisory) पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को ओवरटाइम प्रावधानों के दायरे से बाहर रखा जा सकता है। क्योंकि इनका वेतन निश्चित सीमा से ज्यादा होता है ऐसे मामलों में कर्मचारी की भूमिका, जिम्मेदारियां और सेवा शर्तें अहम होती हैं।

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