झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट का झटका, JPSC-JSSC को जारी किया नोटिस

झारखंड की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सोमवार, 24 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। कोर्ट ने झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
हालांकि, इस सुनवाई का सबसे अहम पहलू यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल CBI जांच का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि कथित गड़बड़ियों की जांच CBI से अथवा सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
किस परीक्षा को लेकर है विवाद?
मामला JPSC यानी झारखंड संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा है। याचिका में परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता, विश्वसनीयता और पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। याचिका के मुताबिक परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच जरूरी है। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के जरिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने दलीलें रखीं।
CBI जांच की मांग क्यों उठी?
याचिका में आरोपों की जांच राज्य की मौजूदा व्यवस्था से अलग किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच जरूरी है। इसके लिए दो विकल्प अदालत के सामने रखे गए हैं—CBI जांच या सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश से स्वतंत्र जांच। अदालत ने अभी इनमें से किसी विकल्प को स्वीकार नहीं किया है। फिलहाल संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका पक्ष मांगा गया है।
छात्र आंदोलन के दौरान हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई ऐसे समय हुई, जब झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर आंदोलन चल रहा है। JPSC का विवाद ऐसे समय सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है, जब झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन काफी समय से चल रहा है।
अभ्यर्थी JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पारदर्शी जांच और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग कर रहे हैं। पिछले दिनों राज्य सरकार ने कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर फैसले किए थे। सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था और दूसरी परीक्षाओं की भी जांच या समीक्षा की बात सामने आई थी।
हालांकि, 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा और संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। इस वजह से पहले से विवादित परीक्षा प्रक्रिया का मामला और जटिल हो गया है।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब सुप्रीम कोर्ट की एंट्री
इस पूरे विवाद में अब एक महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति बन गई है। एक तरफ राज्य सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के बीच कई परीक्षाओं को रद्द करने और जांच की दिशा में कदम उठाए। दूसरी तरफ सफल अभ्यर्थियों ने परीक्षा और नियुक्तियां रद्द किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया, जिसके बाद कुछ मामलों में उन्हें राहत मिली।
JPSC के साथ JSSC का नाम भी क्यों आया?
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं का विवाद केवल JPSC तक सीमित नहीं है। JSSC यानी झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षाओं को लेकर भी अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं। राज्य में हालिया आंदोलन के दौरान JPSC और JSSC दोनों आयोगों की भर्ती प्रक्रिया में सुधार, पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग प्रमुख मुद्दा रही है।
झारखंड सरकार के लिए क्यों अहम है यह नोटिस?
सुप्रीम कोर्ट का नोटिस ऐसे समय आया है जब भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार पहले ही राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में है। अभ्यर्थियों का आंदोलन, कई परीक्षाओं को लेकर उठे सवाल, सरकार के रद्दीकरण संबंधी फैसले और उसके बाद हाईकोर्ट में चुनौती—इन सबके बीच अब शीर्ष अदालत में स्वतंत्र जांच की मांग पहुंच गई है।
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