राजस्थान का ‘संकट हरने’ वाले डीके शिवकुमार होंगे कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री, क्या गहलोत-पायलट के लिए इशारा है सिद्दरमैया का इस्तीफा?

Karnataka new CM: आखिरकार कर्नाटक का नाटक खत्म हो गया। सिद्धरमैया ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है और अब नए सीएम के नाम पर डीके शिवकुमार के नाम पर मुहर लग गई है। डीके शिवकुमार राजस्थान का राजस्थान से भी नाता है। वे राजस्थान के लिए उस वक्त काम आए जब गहलोत सरकार डावांडोल चल रही थी। तब डीके शिवकुमार ने आकर बंद कमरे में मीटिंग्स कर सरकार को स्थिर करने की कोशिशें की थीं।
We were put in Jail, mother Sonia Gandhi visited us and gave us strength, that can never be forgotten.
That is why our loyalty lies with Gandhi family and Congress.
— DK Shivakumar
Loyalty has not been treated cheap and it should not be… pic.twitter.com/Pvq2KyDkH3
— Shantanu (@shaandelhite) May 28, 2026
2021 में राजस्थान सरकार के संकट को मिटाने आए थे शिवकुमार
अगस्त 2021 में डीके शिवकुमार राजस्थान के दौरे पर आए थे। तब राजस्थान में कांग्रेस की गहलोत सरकार थी और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, सचिन पायलट के बीच सियासी तनातनी चल रही थी और दोनों के गुटों के बीच राजनैतिक नियुक्तियों लेकर उठापटक चल रही थी। तब राजस्थान की इस सियासत पर पूरे देश और दिल्ली के आलाकमान की नजरें बनी हुई थीं। आलाकमान ने ही डीके शिवकुमार को संकटमोचक बनाकर राजस्थान भेजा था।
Karnataka CM and Deputy CM, Siddaramaiah and DK Shivakumar, respectively, share a hug at the CM residence in Bengaluru at the breakfast meeting#Karnataka #DKSHIVAKUMAR #Siddaramaiah @INCKarnataka @DKShivakumar pic.twitter.com/giHTGBBSxW
— Monu Lodhi 🇮🇳 (@monu_lodh) May 28, 2026
इस दौरे के दौरान डीके शिवकुमार ने गहलोत और पायलट के साथ बंद कमरे में घंटों तक बैठक की थी और जब कमरा खुला तो शांति का पिटारा हाथ में था। यानी इस मीटिंग के बाद गहलोत-पायलट विवाद पर पूर्णविराम लगने की बात कही गई थी।
हालांकि इसके बाद डीके शिवकुमार राजस्थान आए थे। 14 सितंबर 2023 को कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री के तौर पर डीके शिवकुमार जयपुर पहुंचे थे और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की सराहना भी की थी।
पायलट-गहलोत के लिए क्या सीख है कर्नाटक की पिक्चर?
इधर राजनीतिक जानकारों का कहना है कि एक कहावत है कि 'धैर्य का फल मीठा होता है', लेकिन कर्नाटक के 'संकटमोचक' डीके शिवकुमार ने साबित कर दिया कि फल सिर्फ मीठा नहीं, सीधा 'मुख्यमंत्री की कुर्सी' जैसा होता है! क्योंकि राजस्थान के सियासी अखाड़े में जब सचिन पायलट सालों तक एड़ी-चोटी का जोर लगाते रह गए, बाड़ेबंदी की, बगावती तेवर दिखाए, लेकिन सूबे के 'जादूगर' अशोक गहलोत ने उन्हें कुर्सी के पास फटकने तक नहीं दिया। पायलट इंतज़ार ही करते रह गए।
लेकिन कर्नाटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति का भूगोल बदल दिया है। जो करिश्मा राजस्थान में सचिन पायलट नहीं कर सके, वो कर्नाटक में डीके शिवकुमार ने कर दिखाया है! सिद्धारमैया ने अशोक गहलोत और भूपेश बघेल से अलग मिसाल पेश करते हुए हंसते-हंसते कांग्रेस आलाकमान के कहने पर कुर्सी 'रॉकस्टार' डीके शिवकुमार को सौंप दी। लेकिन जाते-जाते पिछड़े वर्ग की कास्ट सर्वे रिपोर्ट स्वीकार करके एक चुनौतीपूर्ण टास्क भी दे दिया है।
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