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मंत्री जी...आपसे इस जवाब की तो उम्मीद नहीं थी, कोटा में प्रसूताओं की मौत के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री का बेतुका बयान

मंत्री जी...आपसे इस जवाब की तो उम्मीद नहीं थी, कोटा में प्रसूताओं की मौत के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री का बेतुका बयान
राजस्थान
15 May 2026, 03:19 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Kota: कोटा मेडिकल कॉलेज में लगातार 4 प्रसूताओं की मौत के बाद पूरा शासन-प्रशासन सवालिया निशाने पर आ गया है। इन घटनाओं ने पूरे राजस्थान को झकझोर कर रख दिया है। सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक करके 4 प्रसूताओं की मौत हो जाती है और 8 महिलाओं की जिंदगी ICU में वेंटिलेटर पर लटक जाती है। लेकिन शर्मनाक बात देखिए, घटना के पूरे 9 दिन बाद जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कोटा पहुंचते हैं, तो उनके पास इस दर्दनाक हादसे का कोई जवाब नहीं होता। पीड़ितों को इंसाफ देने के बजाय मंत्री जी इसे 'एक पहेली' बताकर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं।

सरकारी अस्पतालों की तारीफों के बांधे पुल

कोटा में पूरे 170 मिनट यानी करीब ढाई घंटे मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर कोटा में रुके। अधिकारियों के साथ बैठक की, अस्पतालों का दौरा किया, लेकिन जब मीडिया के सामने आए तो उनके गैर-जिम्मेदाराना तेवर देखकर हर कोई दंग रह गया। स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि 'संभवतया ब्लड स्ट्रीम में कुछ गया है, हमारे पास अभी इसका कोई जवाब नहीं है।' हैरानी की बात तो ये है कि जहां पीड़ित परिवार न्याय के लिए रो रहे हैं, वहां मंत्री खींवसर मीडिया के सामने बैठकर सरकारी अस्पतालों की झूठी तारीफों के पुल बांध रहे थे।

प्राइवेट अस्पतालों को कोसकर मीडिया पर ही भड़के

गजेंद्र सिंह खींवसर ने निजी अस्पतालों को तो जमकर कोसा, लेकिन सरकारी अस्पतालों पर कुछ नहीं बोले। उन्होंने कहा कि 'प्राइवेट वाले सिर्फ मुनाफे के लिए नॉर्मल डिलीवरी को भी सिजेरियन कर देते हैं।' पर यहां सवाल तो आपके सरकारी सिस्टम पर है! जब पत्रकारों ने अस्पताल की बदहाली पर सवाल उठाया, तो उल्टा मीडिया पर ही भड़क गए और तंज कसते हुए बोले- 'क्या आप खराब अस्पताल में जाएंगे? यहां ओपीडी इतनी ऊंची है, आप बताओ लोग पागल हैं क्या जो इतने लोग आ रहे हैं?' अब ये बयान साफ दिखाता है कि वे संवेदनशीलता खो चुके हैं।"

स्वास्थ्य मंत्री भले ही इसे डॉक्टरों को बचाने के लिए ब्लड पॉइज़निंग का नाम न दें, लेकिन सच ये है कि सिस्टम की लापरवाही ने 4 घरों के चिराग बुझा दिए हैं। मामले के तूल पकड़ने पर सरकार ने अब तक डॉ. श्रद्धा की सेवाएं बर्खास्त की हैं, जबकि डॉ. बीएल पाटीदार, डॉ. खुशबू मीणा समेत कई नर्सिंग स्टाफ को सस्पेंड कर दिया है। ड्रग डिपार्टमेंट ने अस्पतालों से 33 दवाओं के सैंपल लिए हैं, जिनमें से 9 सर्जिकल सैंपलों को जांच के लिए कोलकाता भेजा गया है। जब तक रिपोर्ट नहीं आती, इन दवाओं पर रोक है।


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