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भोजशाला पर हिंदुओं की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने माना हिंदू मंदिर, मुस्लिमों को जगह देने का आदेश

भोजशाला पर हिंदुओं की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने माना हिंदू मंदिर, मुस्लिमों को जगह देने का आदेश
राष्ट्रीय
15 May 2026, 05:44 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Bhojshala Verdict: एमपी हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को हिंदू मंदिर मान लिया है। जी हां, शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ इस केस में अयोध्या मामले को भी आधार माना। कोर्ट ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, ASI की सर्वे रिपोर्ट पर भी विचार किया है। कोर्ट ने ASI का वो 2003 आदेश भी रद्द कर दिया जिसमें हिंदुओं से पूजा का अधिकार छीना गया था और मुस्लिमों को नमाज की परमिशन दी गई थी।

ASI सर्वे रिपोर्ट में मिले हिंदू स्थल के सबूत

सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि सबूतों में पता चला है कि भोजशाला में ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है। ASI सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि मौजूद संरचना, मंदिरों के अवशेषों जैसे स्तंभों और बीमों का इस्तेमाल करके बनाई गई थी। हिंदू पक्ष से ये केस लड़ने वाले विष्णु शंकर जैन ने कहा कि कोर्ट ने भोजशाला कॉम्प्लैक्स को राजा भोज का माना है। एक सरस्वती स्कूल माना है। वहां से लंदन के म्यूजियम से मूर्ति लाने की मांग पर कोर्ट ने कहा कि इस पर सरकार जल्द विचार के। भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे मुस्लिम पक्ष को कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के लिए अलग जमीन मांगने को कहा है। कि वो सरकार से अपनी ये मांग रख सकते हैं।

धार_भोजशाला पर HC का ऐतिहासिक फैसला
हिंदू पक्ष की मांग किया मंजूर
भोजशाला परिसर मां सरस्वती का मंदिर
धार भोजशाला में सिर्फ पूजा होगी
धार भोजशाला में नमाज पर रोक
HC के फैसले से हिंदू पक्ष में खुशी की लहर pic.twitter.com/tFCKh6shl1
— Ruby Tiwari (@tiwari_dee4008) May 15, 2026

भोजशाला में सिर्फ पूजा होगी। अब कोर्ट का आखिरी फैसला है। भोजशाला का पूरा परिसर हिंदू स्थल है और बाहर के परिसर पर कोई बात नहीं हुई है।

क्या था पूरा विवाद

बता दें कि एमपी के धार स्थित भोजशाला पर मुस्लिम समुदाय के लोग मस्जिद का संपत्ति होने का दावा कर रहे थे। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर (भोजशाला) मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। जिसके बाद ये मामला विवादों में आया। 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की दायर याचिका के बाद से ये चर्चा में था। सबूतों में पता चला है कि 11वीं शताब्दी में राजा भोज के स्थापित ये स्थल एक प्रसिद्ध शिक्षा केंद्र था।

भोजशाला विवाद धार्मिक अधिकार, सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत के जोड़ पर सालों से चर्चा में रहा है। हाईकोर्ट का ये फैसला दोनों समुदायों के धार्मिक और सांस्कृतिक दावों के बीच संवेदनशील संतुलन को प्रभावित कर सकता है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों ने क्षेत्र में तनाव को रोकने के लिए अतिरिक्त उपाय किए हैं।


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