मोदी की ‘7 अपीलों’ पर मचा सियासी बवाल! राहुल गांधी ने कह दिया "नाकामी का सबूत"

Rahul Gandhi Attacks on PM Modi's 7 Appeals: हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने तेलंगाना में अपने भाषण में सोना नहीं खरीदने और फॉरेन टूर नहीं करने जैसी बातें कही, उनको लेकर सियासत गरमा गयी है। नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने मोदी की सात सार्वजनिक अपीलों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा कि ये अपीलें किसी दूरदर्शी नीति का हिस्सा नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी का सबूत है।
मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न…
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 11, 2026
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री की जनता से ये मांगें उपदेश नहीं- नाकामी का सबूत है। मोदी सरकार जनता पर ज़िम्मेदारी डालकर खुद बचकर निकलना चाह रहे हैं। कहा कि “देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।”
राहुल गाँधी ने लिखा “मोदी जी ने कल जनता से त्याग मांगे - सोना मत ख़रीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम जलाओ, खाद और खाने का तेल कम करो, मेट्रो में चलो, घर से काम करो।
ये उपदेश नहीं - ये नाकामी के सबूत हैं।
12 साल में देश को इस मुक़ाम पर ला दिया है कि जनता को बताना पड़ रहा है - क्या ख़रीदे, क्या न ख़रीदे, कहां जाए, कहां न जाए। हर बार ज़िम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं ताकि ख़ुद जवाबदेही से बच निकलें।
देश चलाना अब Compromised PM के बस की बात नहीं।”
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बीते सालों में देश की आर्थिक स्थिति ऐसी हो गई है कि अब आम नागरिकों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों में कटौती करनी पड़ रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश चलाना सरकार की जिम्मेदारी है, न कि जनता पर हर संकट का भार जनता।
कांग्रेस के सांसद कीर्ति चिदंबरम ने मांग की कि सरकार को संसद में इसका जवाब देना चाहिए कि ऐसी परिस्थितियां आखिर क्यों बनीं। संसद का एक विशेष सत्र बुलाकर पूरे देश को स्थिति से अवगत कराया जाए।
वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी कहा कि पिछले दो महीनों से युद्ध चल रहा है, लेकिन सरकार आपका बोझ उठा रही थी। अब जब चुनाव ख़त्म हो गए हैं, तो आपकी ज़रुरत भी खत्म हो गयी है। क्या सरकार तो तब नहीं मालूम था पेट्रोल और सोने के बारे में। लेकिन चुनाव ज्यादा ज़रूरी हैं।
इन सात अपीलों को लेकर दो अलग-अलग तरह का नजरिया देखने को मिल रहा है। एक तरफ कुछ लोग इसे जागरूकता और देश के लिए सही बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग इसे आर्थिक चुनौतियों के संकेत कह रहे हैं।
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