JJM घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी गिरफ्तार, ACB की बड़ी कार्रवाई से राजस्थान की राजनीति में हलचल

Mahesh Joshi Arrest JJM Scam: राजस्थान के बहुचर्चित जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने गुरुवार सुबह बड़ी कार्रवाई की। तड़के 5 बजे टीम ने पूर्व PHED मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी को गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसी ने जयपुर स्थित उनके आवास से उन्हें पकड़ा। बता दें कि ये मामला करीब 900 से 960 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले से जुड़ा है।
ACB की जांच के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत जारी टेंडरों में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों का इस्तेमाल कर कुछ कंपनियों को गलत तरीके से फायदा पहुंचाया गया। आरोप है कि मंत्री पद पर रहते हुए महेश जोशी ने टेंडर प्रक्रिया में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्वत ली और नियमों की अनदेखी की।
सुबह 5 बजे पहुंची ACB टीम
ACB की विशेष जांच टीम (SIT) गुरुवार सुबह करीब 5 बजे जयपुर की सैन कॉलोनी स्थित महेश जोशी के घर पहुंची। पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई को JJM मामले में अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक गिरफ्तारी माना जा रहा है। महेश जोशी को इससे पहले अप्रैल 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच में गिरफ्तार किया था। बाद में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई थी। अब ACB ने भ्रष्टाचार और टेंडर अनियमितताओं से जुड़े मामले में दोबारा गिरफ्तारी की है।
22 अधिकारियों पर भी केस
ACB ने इस मामले में पूर्व मंत्री सहित 22 अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ FIR दर्ज की है। इनमें PHED विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी, वित्तीय सलाहकार और मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी भी इसी मामले में हुई है।
ईमेल ID से खुला पूरा नेटवर्क
महेश जोशी पर हाथ डालने से पहले ACB ने बड़ी गहरी छानबीन और जांच की। जिसमें एजेंसी को एक संदिग्ध ईमेल ID मिली। इसके बाद डिजिटल ट्रेल और वित्तीय लेनदेन की जांच में इस सिंडिकेट का खुलासा हुआ जिसने सीधे-सीधे महेश जोशी के इस मामले में शामिल होने के संकेत दिए।
राजनीतिक असर भी गहरा
राजस्थान में पहले ही जेजेएम घोटाला (JJM Scam) बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। भाजपा लगातार कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाती रही है। मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने 20 जून 2023 को जयपुर के अशोक नगर थाने में FIR दर्ज कराने के लिए दो दिन तक धरना दिया था। ऐसे में पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी से प्रदेश की राजनीति में में हलचल मच गई है। कहा जा रहा है कि अब ACB महेश जोशी और सुबोध अग्रवाल को आमने-सामने बिठा कर सवाल-जवाब कर सकती है। और तो और एजेंसी ने तो पूर्व सरकार के दौरान CMO के अधिकारियों पर भी गाज़ गिराने के संकेत दिए थे।
क्या है पूरा JJM घोटाला?
गौरतलब है कि ये मामला केंद्र सरकार की ‘जल जीवन मिशन’ (Jal Jivan Mission) योजना से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाना था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि कुछ निजी कंपनियों ने फर्जी सर्टिफिकेट लगाकर करोड़ों रुपये के टेंडर हासिल किए थे। एक कंपनी गणपति ट्यूबवेल को करीब 859 करोड़ रुपए के टेंडर मिले। दूसरी कंपनी श्री श्याम ट्यूबवेल को लगभग 120 करोड़ रुपए दिए गए। टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और मिलीभगत के आरोप लगे हैं। सुराग मिला है कि महेश जोशी ने अपने कार्यकाल के दौरान इन कंपनी को फर्जी तरीके से टेंडर दिलाने के लिए रिश्वत ली थी।
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