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राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, स्कूलों में पढ़ाने के लिए नीति लागू करने का दिया आदेश

राजस्थानी भाषा पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, स्कूलों में पढ़ाने के लिए नीति लागू करने का दिया आदेश
राजस्थान
12 May 2026, 03:04 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान में राजस्थानी भाषा को शिक्षा व्यवस्था में लागू करने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश की बीजेपी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कोर्ट ने ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। अदालत ने सरकार से कहा है कि वह सभी सरकारी और निजी स्कूलों में राजस्थानी को एक विषय के तौर पर शामिल करने के लिए साफ नीति बनाएं। ये आदेश प्रदेश की साढ़े 7 करोड़ आबादी के लंबे इंतजार और संघर्ष के लिहाज़ से एक बड़ा फैसला है।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

ये फैसला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनाया। अदालत ने सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई और कहा कि जब राजस्थानी भाषा विश्वविद्यालयों मे पढ़ाई जा रही है तो स्कूलों में क्यों नहीं? कोर्ट ने साफ किया कि 2020 में आई नई शिक्षा नीति में भी साफ किया गयाकि बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही शिक्षा देनी है। तो फिर संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर सुप्रीम कोर्ट मूक दर्शक नहीं रह सकता।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान की सरकार को आदेश दिया गया है कि वो इस पर जल्द पॉलिसी बनाए और राजस्थानी भाषा की किताबों और इनके कोर्स को राजस्थानी को स्कूलों में लागू करे।

सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सरकार को गाइड भी कि ऐसे कैसे करना है। कोर्ट के मुताबिक पहले फाउंडेशनल और प्राथमिक स्तर पर राजस्थानी को विषय या माध्यम के तौर पर शामिल किया जाए। फिर इसे माध्यमिक शिक्षा में लाया जाए। इतना ही नहीं इसे सरकारी और निजी दोनों स्कूलों में लागू करना होगा।

संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं

राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल नहीं किया गया है। 4.36 करोड़ लोगों के राजस्थानी भाषी होने के बावजूद इसे भाषा का दर्जा नहीं दिया गया है। क्योंकि यहां पर कई बोलियां हैं, और ये हिंदी का ही अपभ्रंष हैं। आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं हैं, जिसमें गुजराती, असमिया, उर्दू, हिंदी, मराठी, पंजाबी, बंगाली, तमिल, कन्नड़, तेलुगू, उड़िया, कश्मीरी, बोडो, डोगरी, सिंधी, संथाली, संस्कृत, मैथिली, मणिपुरी, मलयालम, नेपाली, कोंकणी भाषाओं आती हैं।


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