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चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीन चिट! SIR को बताया पूरी तरह वैध

चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट से मिली क्लीन चिट! SIR को बताया पूरी तरह वैध
राष्ट्रीय
27 May 2026, 02:44 pm
रिपोर्टर : Dushyant

पांच राज्यों में चुनाव के दौरान हुए वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह वैध और संवैधानिक करार देते हुए चुनाव आयोग की प्रक्रिया को पूरी तरह सही ठहराया। बुधवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग को SIR जैसे काम के लिए विशेष प्रक्रिया से काम करने का हक़ है। चुनाव आयोग ने SIR कार्यक्रम के दौरान कानून के दायरे में ही रहकर काम किया है और यह किसी तरह की मनमानी नहीं है।

कोर्ट ने साफ़ किया कि SIR का मकसद चुनावी प्रक्रिया को कमजोर करना नहीं, बल्कि इसे निष्पक्ष, पारदर्शी और सही बनाना है। साथ ही, बेंच ने चुनाव आयोग को यह भी निर्देश दिया कि वोटर लिस्ट से जो भी संदिग्ध नाम हटाए गए हैं, उनकी एक लिस्ट तैयार कर चार हफ्ते के अंदर केंद्र सरकार को भिजवाई जाए। केंद्र की संबंधित एजेंसी इन व्यक्तियों को नोटिस जारी कर अपनी बात रखने का मौका देगी और चुनाव से पहले उनका मामला निपटाएगी।

बिहार से शुरू हुआ SIR

चुनाव आयोग ने जून 2025 में सबसे पहले बिहार में SIR अभियान शुरू किया था, क्योंकि यहां सबसे पहले विधानसभा चुनाव होने वाले थे। बाद में पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी यह काम हुआ। रिकॉर्ड के मुताबिक, इन राज्यों में करीब 2.65 करोड़ वोटर्स के नाम काट दिए गए थे। इसलिए इन राज्यों से SIR के खिलाफ कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।

कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के पास SIR करने का पूरा अधिकार है। SIR की पूरी प्रक्रिया वैध और संतुलित रही है। आयोग ने जो कदम उठाए हैं, वो गलत नहीं है। कोर्ट ने आधार कार्ड सहित 11 दस्तावेजों को वैध माना और कहा कि दस्तावेज मांगना मनमाना नहीं है। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम का भी कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

साथ ही, कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन लोगों का नाम काटा गया है, उनके नाम चुनाव आयोग 4 हफ़्तों के भीतर केंद्र के नागरिकता से सम्बंधित अधिकारी को भेजे। अधिकारी उन्हें नोटिस जारी कर उनका पक्ष सुनेगा और आने वाले निकाय चुनाव से पहले उन पर कार्यवाही कर उनके नाम वापस लिस्ट में जोड़ने या हटाने का काम करेगा।

विपक्ष का विरोध

विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे सत्तापक्ष की साजिश बताया था। विपक्ष का कहना है कि अचानक चुनाव से ठीक पहले इतनी हड़बड़ी में SIR क्यों करवाया जा रहा है? विपक्ष ने आरोप लगाया कि यह चुनाव में अपनी जीत पक्की करने और लोगों को परेशान किया जा रहा है।

लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से SIR प्रक्रिया पर लगी कानूनी अनिश्चितता समाप्त हो गई है।


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