भरतपुर-टोंक में कांग्रेस का बड़ा सियासी दांव, नेम सिंह फौजदार और गोपाल गुर्जर ने थामा कांग्रेस का हाथ

Rajasthan Politics: राजस्थान की सियासत में कांग्रेस ने भरतपुर से जुड़ा बड़ा राजनीतिक कदम उठाया है। भरतपुर की राजनीति में सक्रिय माने जाने वाले नेम सिंह फौजदार और टोंक के मालपुरा से गोपाल गुर्जर ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली है। दोनों नेताओं को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता दिलाई गई।
दोनों नेताओं के कांग्रेस में शामिल होने को भरतपुर और टोंक की स्थानीय राजनीति के लिहाज से अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। खास तौर पर नेम सिंह फौजदार की जाट समाज और आरक्षण आंदोलन से जुड़ी सक्रियता को देखते हुए उनके कांग्रेस में आने पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कौन हैं नेम सिंह फौजदार?
नेम सिंह फौजदार भरतपुर-धौलपुर जाट आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक के तौर पर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। जाट आरक्षण की मांग को लेकर हुए आंदोलनों और महापंचायतों में उनकी प्रमुख भूमिका रही है। 2025 में भी उनके नेतृत्व में भरतपुर में जाट आरक्षण को लेकर बड़ी महापंचायत आयोजित की गई थी।
फौजदार जाट समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर लगातार मुखर रहे हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भी उन्होंने भरतपुर क्षेत्र में जाट आरक्षण के मुद्दे को लेकर अभियान चलाया था।
वे 2018 से आधिकारिक रूप से बीजेपी में सक्रिय हुए थे। पहले वे समाजवादी पार्टी से जुड़े थे। 2003 में डीग से और 2018 में नगर सीट से चुनाव उन्होंने सपा के टिकट पर लड़ा था। इसके बाद वे बीजेपी में शामिल हो गए। 2021 में बीजेपी ने उन्होंने किसान मोर्चा का प्रदेश प्रवक्ता बनाया था। इससे वे पूर्वी राजस्थान में बीजेपी का एक प्रमुख चेहरा बन गए थे। लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो उन्होंने पार्टी से विदाई ले ली।
गोपाल गुर्जर के कांग्रेस में आने से क्या संदेश?
गोपाल गुर्जर भी गुर्जर समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे मालपुरा विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में गुर्जर समाज से जुड़े नेता का कांग्रेस के साथ आना भी पार्टी के लिए स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरतपुर की सियासत में नए समीकरण?
नेम सिंह फौजदार और गोपाल गुर्जर के कांग्रेस में शामिल होने के बाद भरतपुर की राजनीति में नए समीकरणों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ कांग्रेस को जाट समाज से जुड़े प्रभावशाली चेहरे का साथ मिला है, तो दूसरी ओर गुर्जर समाज से जुड़े नेता के पार्टी में आने से सामाजिक और राजनीतिक स्तर पर इसका असर देखने को मिल सकता है।
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