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भीलवाड़ा में कांग्रेस की अंदरूनी कलह फिर आई सामने, पार्टी नेताओं ने डोटासरा के खिलाफ किया 'सद्बुद्धि यज्ञ’

भीलवाड़ा में कांग्रेस की अंदरूनी कलह फिर आई सामने, पार्टी नेताओं ने डोटासरा के खिलाफ किया 'सद्बुद्धि यज्ञ’
राजनीति
20 Sept 2026, 12:36 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

भीलवाड़ा: राजस्थान कांग्रेस में अंदरूनी विवाद एक बार फिर खुलकर सामने आया है। भीलवाड़ा जिला कांग्रेस कमेटी कार्यालय में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) सदस्य मनोज पालीवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के खिलाफ विरोध दर्ज कराते हुए महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने 'सद्बुद्धि यज्ञ' किया। पालीवाल ने यज्ञ के जरिए डोटासरा को सद्बुद्धि मिलने और उनके प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने की मांग की।

मनोज पालीवाल का यह विरोध हाल ही में हुए भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव में कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के सिंबल विवाद को लेकर है। पालीवाल ने आरोप लगाया कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व और प्रभारी मुकेश वर्मा की लापरवाही के कारण 17 प्रत्याशियों के पार्टी सिंबल से जुड़े अथॉरिटी लेटर समय पर निर्वाचन अधिकारी तक नहीं पहुंच पाए। इस मामले को लेकर उन्होंने पहले भी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर जांच की मांग की थी।

17 प्रत्याशियों के सिंबल को लेकर हुआ था विवाद

भीलवाड़ा नगर निगम में कुल 70 वार्ड हैं। चुनाव के दौरान कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों को पार्टी के चुनाव चिह्न से जुड़े दस्तावेज समय पर नहीं मिलने का मामला सामने आया था। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने बाद में इस विवाद से जुड़ी 17 याचिकाएं खारिज कर दीं, जिसके बाद कांग्रेस के 53 अधिकृत प्रत्याशी ही चुनाव मैदान में रह गए।

महापौर चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी नहीं उतार पाई

भीलवाड़ा नगर निगम के महापौर चुनाव को लेकर भी कांग्रेस सवालों के घेरे में है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस की ओर से महापौर पद के लिए कोई पार्षद नामांकन दाखिल नहीं कर पाया। चुनाव में बीजेपी की जसवंत कंवर और निर्दलीय संतोष कंवर के बीच मुकाबला रहा।

मनोज पालीवाल ने इसी घटनाक्रम को लेकर भी प्रदेश नेतृत्व पर सवाल उठाए और कहा कि स्थानीय कांग्रेस नेताओं को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।

डोटासरा के इस्तीफे की मांग

यज्ञ के दौरान पालीवाल ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति का अपमान करना नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी से कार्रवाई का सामना करना पड़े, तब भी वे कार्यकर्ताओं की आवाज उठाते रहेंगे।

पंचायत चुनाव से पहले उठे संगठन पर सवाल

पालीवाल ने आगामी पंचायती राज चुनावों को लेकर भी संगठनात्मक तैयारियों पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि यदि भीलवाड़ा जैसे मामलों से सबक नहीं लिया गया तो आने वाले चुनावों में कार्यकर्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, भीलवाड़ा नगर निगम चुनाव के अंतिम परिणामों में बीजेपी ने 70 में से 45 वार्ड जीते, जबकि कांग्रेस को 10 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं।

भीलवाड़ा में सामने आया यह विवाद फिलहाल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक जिम्मेदारी और चुनावी प्रबंधन को लेकर उठे सवालों को केंद्र में ला रहा है। अब देखना होगा कि प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व मनोज पालीवाल के विरोध और लगाए गए आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।


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