बेनीवाल के लिए राजस्थान में शुरू मुस्लिम vs मुस्लिम राजनीति, क्यों फतेह खान पर भड़का समुदाय

राजस्थान की सियासत में इन दिनों ज़ुबानी जंग का तापमान लगातार चढ़ता जा रहा है। लेकिन इस बार का सियासी घमासान केवल दो पार्टियों के बीच नहीं, बल्कि एक ही समुदाय के नेताओं के बीच 'आर-पार' की जंग में बदल चुका है। मामला जुड़ा है (RLP) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल और कांग्रेस के कद्दावर नेता फतेह खान से।
हाल ही में कांग्रेस की 'संविधान सद्भावना पदयात्रा' के दौरान फतेह खान ने RLP को लेकर एक विवादित बयान दिया, जिसने पूरे सूबे के राजनीतिक पारे को बढ़ा दिया। फतेह खान ने RLP और उसके नेताओं की तुलना 'बरसाती कीड़ों' से कर डाली। इस बयान के सामने आते ही RLP के मुस्लिम कार्यकर्ता और नेता हमलावर हो गए और देखते ही देखते यह पूरा मुद्दा मुस्लिम बनाम मुस्लिम राजनीति की शक्ल ले चुका है।
'इंसान की अक्ल कभी चली जाती है'
कांग्रेस नेता फतेह खान के इस तीखे बयान पर अब RLP के मुस्लिम नेताओं ने करारा पलटवार किया है। RLP कार्यकर्ताओं का कहना है कि भीड़ और सैलाब को देखकर कुछ नेताओं का 'जोश में होश' खो जाना आम बात हो गई है। जब RLP के स्थानीय मुस्लिम नेताओं से इस पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा- "इंसान की कभी अक्ल चली जाती है, गलत ज़ुबान से निकल जाता है। लेकिन हनुमान बेनीवाल सब बर्दाश्त करने वाले नेता हैं।“
RLP के नेताओं का दावा है कि फतेह खान ने अपने बयान पर बाद में माफी भी मांग ली थी, लेकिन पार्टी के ज़मीनी कार्यकर्ताओं में गुस्सा अभी भी बरकरार है। आइए आपको सुनाते हैं RLP कार्यकर्ता का वह बयान, जिसने इस पूरी बहस को एक नया मोड़ दे दिया है।
क्या मुस्लिम वोटों का होगा ध्रुवीकरण
यानी RLP का साफ तौर पर मानना है कि कांग्रेस नेताओं को अपनी बात रखते वक्त मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। हालांकि, RLP नेतृत्व की तरफ से कार्यकर्ताओं को शांत रहने की हिदायत दी गई है, लेकिन राजस्थान की राजनीति को करीब से देखने वाले जानकार मानते हैं कि मारवाड़ और बाड़मेर-जैसलमेर के इलाके में मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की यह महज़ एक शुरुआत है।
एक तरफ जहां कांग्रेस अपने पारंपरिक वोट बैंक को साधने में जुटी है, वहीं बेनीवाल की RLP मुस्लिम-जाट समीकरण के ज़रिए कांग्रेस के इसी गढ़ में सेंध लगाने की पूरी कोशिश कर रही है। अब देखना यह होगा कि 'बरसाती कीड़े' वाले इस बयान की आंच आने वाले दिनों में राजस्थान की सियासत को और कितना सुलगाती है।
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