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‘7 दलों की हांडियां चाट कर आए हैं, मुझे क्या चरित्र सिखाएंगे’, प्रहलाद गुंजल पर मदन दिलावर का पलटवार

‘7 दलों की हांडियां चाट कर आए हैं, मुझे क्या चरित्र सिखाएंगे’, प्रहलाद गुंजल पर मदन दिलावर का पलटवार
राजनीति
08 Sept 2026, 03:15 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

कोटा। राजस्थान के निकाय चुनाव के बीच कोटा में बीजेपी और कांग्रेस के दो दिग्गज नेताओं के बीच जुबानी जंग अब व्यक्तिगत हमलों तक पहुंच गई है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और कांग्रेस नेता प्रहलाद गुंजल आमने-सामने हैं। सोमवार को गुंजल के तीखे बयान के बाद मंगलवार को दिलावर ने पलटवार करते हुए उन्हें दल-बदलू बताया और कहा कि जो नेता कई दलों में रह चुके हैं, वे उन्हें चरित्र का पाठ न पढ़ाएं।

दिलावर ने गुंजल पर हमला बोलते हुए कहा कि “गुंजल तो दल-बदलू हैं। वो 7 दलों की हांडियां चाटकर आए हैं। वो मुझे क्या चरित्र का पाठ पढ़ाएंगे।” दिलावर का यह बयान कोटा के रामगंजमंडी इलाके में निकाय चुनाव प्रचार के दौरान सामने आया।

दिलावर ने इससे पहले भी गुंजल पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया था कि वे कभी बसपा तो कभी कांग्रेस में चले गए और अब बीजेपी में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि बीजेपी ऐसे “बिकाऊ” लोगों को वापस नहीं लेगी।

गुंजल के बयान के बाद दिलावर का पलटवार

दरअसल, प्रहलाद गुंजल ने सोमवार को मदन दिलावर के बयानों पर पलटवार किया था। गुंजल ने कहा कि दिलावर को व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना चाहिए और जनता से जुड़े मुद्दों पर बात करनी चाहिए।

गुंजल ने कहा था कि, “तुझे प्रह्लाद गुंजल जैसा किरदार जीने के लिए सात जन्म लेने पड़ेंगे।” इस बयान के बाद दोनों नेताओं के बीच सियासी वार-पलटवार और तेज हो गया।

गुंजल का कहना था कि राजनीतिक बहस मुद्दों पर होनी चाहिए, व्यक्तिगत टिप्पणियों पर नहीं। लेकिन इसके जवाब में दिलावर ने उनके राजनीतिक सफर और दल बदलने को ही निशाना बना दिया।

दिलावर ने निर्दलीयों पर भी साधा निशाना

मदन दिलावर ने सिर्फ प्रहलाद गुंजल पर ही हमला नहीं बोला, बल्कि निकाय चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों को लेकर भी मतदाताओं को सावधान किया। दिलावर ने आरोप लगाया कि चुनाव में कई लोग निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरते हैं। चुनाव जीतने के बाद वे कथित तौर पर 10-20 लाख रुपये लेकर राजनीतिक दल बदल लेते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे उम्मीदवारों को लेकर सावधानी बरतने की अपील की। दिलावर ने बीजेपी को ईमानदार और समर्पित लोगों की पार्टी बताते हुए कहा कि पार्टी ऐसे लोगों को महत्व देती है जो विचारधारा और संगठन के साथ खड़े रहते हैं।

गुंजल के राजनीतिक सफर पर दिलावर का हमला

प्रहलाद गुंजल के राजनीतिक सफर को लेकर मदन दिलावर लगातार सवाल उठा रहे हैं। 7 सितंबर को भी उन्होंने गुंजल को निशाना बनाते हुए कहा था कि ऐसे नेताओं पर भरोसा करना वोट खराब करने जैसा है। रिपोर्टों के मुताबिक दिलावर ने गुंजल के कभी बसपा और फिर कांग्रेस में जाने का जिक्र करते हुए उन पर राजनीतिक अवसरवाद का आरोप लगाया था।

हालांकि, गुंजल का राजनीतिक सफर मुख्य रूप से बीजेपी में लंबे समय तक रहा है। वे करीब चार दशक तक बीजेपी से जुड़े रहे और 2003 में रामगंजमंडी से बीजेपी विधायक चुने गए थे। 2024 में उन्होंने बीजेपी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामा और कांग्रेस के टिकट पर कोटा-बूंदी लोकसभा चुनाव लड़ा।

2023 के विधानसभा चुनाव में गुंजल बीजेपी के टिकट पर कोटा उत्तर से चुनाव लड़े थे और कांग्रेस के शांति धारीवाल से 2,486 वोट से हार गए थे। वहीं मदन दिलावर रामगंजमंडी सीट से बीजेपी के टिकट पर जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।

2024 में आमने-सामने आए थे गुंजल और बीजेपी

प्रहलाद गुंजल ने मार्च 2024 में बीजेपी छोड़कर कांग्रेस जॉइन की थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें कोटा-बूंदी लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां उनका मुकाबला बीजेपी के ओम बिरला से हुआ। गुंजल को उस चुनाव में 7,08,522 वोट मिले और वे दूसरे स्थान पर रहे।

यही वजह है कि कोटा की राजनीति में गुंजल और बीजेपी के बीच टकराव नया नहीं है। अब निकाय चुनाव के दौरान मदन दिलावर और गुंजल के बीच बयानबाजी ने इस पुराने राजनीतिक संघर्ष को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

निकाय चुनाव के बीच बढ़ा सियासी पारा

कोटा में निकाय चुनाव के प्रचार के बीच दोनों नेताओं की बयानबाजी ऐसे समय सामने आई है जब चुनावी माहौल अपने चरम पर है। रामगंजमंडी इलाके में बीजेपी के लिए प्रचार कर रहे मदन दिलावर लगातार पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने में जुटे हैं।

वहीं कांग्रेस की तरफ से प्रहलाद गुंजल भी बीजेपी और राजस्थान की भजनलाल सरकार पर हमलावर हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच चल रही ये जुबानी जंग सिर्फ व्यक्तिगत टकराव तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर निकाय चुनाव के स्थानीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल सवाल यही है कि दिलावर और गुंजल के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग मतदान तक कितनी और तीखी होती है और क्या व्यक्तिगत आरोपों से आगे निकलकर दोनों नेता कोटा के स्थानीय मुद्दों पर चुनावी बहस को वापस ला पाते हैं।


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