मदन राठौड़ के पाकिस्तान समर्थन वाले बयान पर बवाल, सफाई के बाद भी उठ रहे सवाल
एक राष्ट्रवादी पार्टी के नेता और उस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष, जो देशभक्ति और राष्ट्रवाद की बात करती है। आखिर उस नेता की जुबान से पाकिस्तान के समर्थन की बात कैसे निकल सकती है? जी हां, बात हो रही है राजस्थान बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ की, जिनके एक बयान ने राजस्थान की सियासत में बवाल खड़ा कर दिया। मदन राठौड़ ने कहा कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच भिड़ंत होती है, तो वो पाकिस्तान का समर्थन करेंगे। क्योंकि पाकिस्तान हमारा पड़ोसी है।
'मेरे बयान तो तोड़-मरोड़ कर पेश किया'
अब सवाल ये है कि पड़ोसी होने भर से क्या किसी देश का समर्थन किया जा सकता है? और वो भी पाकिस्तान का जिस पर आतंकवाद को लेकर भारत लगातार सवाल उठाता रहा है। जिस देश से भारत के रिश्ते आतंकवाद और सीमा पार हमलों के चलते तनावपूर्ण रहे हैं। लेकिन विवाद बढ़ा तो मदन राठौड़ की सफाई भी सामने आ गई। उन्होंने कहा कि उनकी बात क्रिकेट के संदर्भ में थी। उन्होंने कहा कि मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है।
चलिए, मान लेते हैं कि बात क्रिकेट की थी, लेकिन सवाल यहां भी खत्म नहीं होते। क्रिकेट के मैदान पर भी पाकिस्तान का समर्थन करने की बात कहने से पहले क्या इतना सोचना जरूरी नहीं था कि आखिर संदेश क्या जाएगा? जब आप बीजेपी जैसी राष्ट्रवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हों, तो आपके हर बयान का राजनीतिक मतलब निकाला जाएगा।
अमेरिकी टीम में ज्यादातर भारतीय मूल के खिलाड़ी
अगर बात अमेरिका की क्रिकेट टीम की थी, तो उसकी टीम में भारतीय मूल के कई खिलाड़ी भी खेलते हैं। इनमें मोनांक पटेल, सौरभ नेत्रवलकर, हरमीत सिंह, मिलिंद कुमार, जसदीप सिंह, नोस्थुश केंजिगे और शुभम रंजने जैसे नाम शामिल हैं।
तो सवाल ये है कि क्रिकेट के संदर्भ में दिया गया बयान भी क्या बिना पूरी जानकारी के नहीं दिया गया? क्या बयान देने से पहले यह नहीं देखना चाहिए था कि अमेरिका की टीम में कौन-कौन खेल रहा है? मदन राठौड़ की सफाई अपनी जगह लेकिन उनके बयान ने जो सवाल खड़े किए हैं, उनका जवाब देना जरूरी है। क्योंकि जब बात देश और पाकिस्तान की आती है, तो एक नेता के शब्द सिर्फ शब्द नहीं रहते वो उसकी राजनीतिक सोच और जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े करते हैं।
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