मेवाराम जैन के साथ गहलोत-डोटासरा समेत पूरी कांग्रेस, अब हरीश चौधरी का क्या होगा?

राजस्थान की राजनीति और सोशल मीडिया के 'रील कल्चर' का कनेक्शन अब किसी से छिपा नहीं है और जब प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजनीति के 'जादूगर' कहे जाने वाले अशोक गहलोत खुद "रील" के खौफ की बात करने लगें, तो समझ जाइए कि बात सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि सियासी पारे के चढ़ने का बड़ा संकेत है।
दरअसल बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन के समर्थकों को संबोधित करते हुए पूर्व सीएम अशोक गहलोत का एक बयान सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया है। गहलोत ने चुटकी लेते हुए कहा कि- "अगर कोई नाम छूट जाता, तो सोशल मीडिया पर उसकी रील बन जाती।"
हरीश चौधरी का का नाम आते ही याद आई रील
जयपुर स्थित अशोक गहलोत के सिविल लाइन्स आवास में बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे। गहलोत अपने कार्यकाल में बाड़मेर जिले को दिए गए विकास कार्यों का ब्यौरा दे रहे थे। वे एक-एक कर बाड़मेर के दिग्गज नेताओं के नाम गिनाने लगे- अमीन खान, पदमाराम, मेवाराम जैन, मदन प्रजापति और हेमाराम चौधरी। लेकिन इसी गिनती के दौरान जब उन्हें अहसास हुआ कि हरीश चौधरी का नाम छूट रहा है, तो उन्होंने तुरंत बात संभाली और मुस्कुराकर कहा कि "कोई कमी नहीं रखी, कोई चूक जाता तो रील बन जाती।"
सियासी जानकार इसे सीधे मेवाराम जैन और हरीश चौधरी की अदावत से जोड़कर देख रहे हैं। क्योंकि बाड़मेर कांग्रेस की अंदरूनी कलह किसी से छिपी नहीं है। मेवाराम जैन और बायतु से विधायक एवं पूर्व मंत्री हरीश चौधरी के बीच दूरियां जगजाहिर हैं। गहलोत भी जानते थे कि अगर मेवाराम के समर्थकों के बीच हरीश चौधरी का नाम छूट जाता, तो मीडिया में तुरंत खबर बन जाती कि- “गहलोत ने सबको गिनाया, लेकिन हरीश चौधरी को दरकिनार कर दिया।”
समर्थकों के साथ मेवाराम जैन पहुंचे थे पीसीसी दफ्तर
राजनीति की नब्ज पकड़ने में माहिर गहलोत ने समय रहते अपनी गलती सुधारी और माहौल को हल्का कर दिया। क्योंकि राजस्थान कांग्रेस में गुटबाजी की असली आग तो प्रदेश कांग्रेस कमेटी यानी पीसीसी दफ्तर में धधकती नजर आई। मंगलवार को अजमेर से लेकर बाड़मेर तक शिकायतों का दौर जारी रहा।
एक तरफ बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा के पास पहुंचे। उनके हाथ में पूर्व मंत्री हरीश चौधरी की शिकायतों की लंबी फेहरिस्त थी। हालांकि, मेवाराम जैन ने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन इशारों ही इशारों में कह दिया- "हमने गुटबाजी करने वाले व्यक्ति का नाम अध्यक्ष को बता दिया है। हम चाहते हैं कि पुरानी बातें भूलकर बाड़मेर में गुटबाजी खत्म हो।"
अजमेर कांग्रेस से भी गुटबाजी की शिकायत
दूसरी तरफ, अजमेर के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय जैन भी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का दर्द लेकर डोटासरा के पास पहुंचे। इस नाराजगी को अशोक गहलोत के करीबी धर्मेंद्र राठौड़ के खिलाफ शिकायतों से जोड़कर देखा जा रहा है। विजय जैन ने साफ कहा कि— "अजमेर में एक व्यक्ति की वजह से पूरा सिस्टम बिगड़ गया है और कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया जा रहा है।"
जब शिकायतें हद से बाहर होने लगीं, तो पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा को खुद मोर्चा संभालना पड़ा! डोटासरा ने कार्यकर्ताओं को एकजुटता का मैसेज देते हुए कहा कि-"कांग्रेस पार्टी एकजुट है। हाईकमान का सख्त संदेश है कि सबका सम्मान होना चाहिए। बाड़मेर में लोकसभा चुनाव के वक्त जो मनमुटाव था, तब मेवाराम जैन पार्टी में नहीं थे। अब वे वापस आ चुके हैं। आगामी चुनाव में पूरी पार्टी एक ही 'जाजम' पर बैठकर लड़ेगी और किसी भी कार्यकर्ता के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।"
एक तरफ गहलोत की रील वाली चुटकी और दूसरी तरफ डोटासरा के दफ्तर में शिकायतों का अंबार! यह साफ दिखाता है कि चुनाव से पहले राजस्थान कांग्रेस के भीतर गुटबाजी को साधना आलाकमान के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। अब देखना यह होगा कि क्या डोटासरा की 'एक जाजम' की रणनीति नेताओं के बीच की इस दूरी को पाट पाएगी या नहीं।
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