जनादेश बचाने को आधी रात खुला हाईकोर्ट, 10 पार्षदों की गिरफ्तारी पर रोक, बीजेपी को झटका

राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच रविवार की रात राजस्थान हाईकोर्ट में असाधारण घटनाक्रम देखने को मिला। छुट्टी के दिन रात करीब 10 बजे हाईकोर्ट के दरवाजे खोले गए और चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी की आशंका जताने वाले पार्षदों की याचिकाओं पर विशेष सुनवाई हुई। सुनवाई देर रात से तड़के करीब 2 बजे तक चली। हाईकोर्ट ने हनुमानगढ़ के 9 पार्षदों और बीकानेर के एक नवनिर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद को अंतरिम राहत देते हुए उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। ये सुनवाई ऐसे समय हुई, जब सोमवार को प्रदेश के कई नगर निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना था।
चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी की आशंका
हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों ने पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारी की आशंका को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए रविवार देर रात विशेष सुनवाई हुई और उन्हें अंतरिम सुरक्षा दी गई।
वहीं, बीकानेर नगर निगम के वार्ड नंबर 18 से नवनिर्वाचित पार्षद मकसूद अहमद की याचिका पर भी विशेष सुनवाई हुई। रिपोर्ट के मुताबिक उनके खिलाफ करीब दो महीने पुरानी FIR से जुड़ा मामला था और 15 सितंबर को कोटगेट थाने की ओर से उन्हें गवाह के तौर पर नोटिस दिया गया था। गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए उन्होंने रविवार को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
रविवार रात हुई इस विशेष सुनवाई में हनुमानगढ़ के नौ और बीकानेर के एक पार्षद को चुनाव प्रक्रिया से पहले गिरफ्तारी से अंतरिम कानूनी सुरक्षा मिल गई।
मेयर-सभापति चुनाव से पहले मिली राहत
सोमवार को राजस्थान के 273 नगरीय निकायों में मेयर, सभापति और अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना था। इनमें बीकानेर समेत पांच नगर निगम भी शामिल थे। ऐसे में चुनाव से कुछ घंटे पहले पार्षदों को मिली ये कानूनी राहत महत्वपूर्ण रही।
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