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अपने ही प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे वन मंत्री संजय शर्मा, गहलोत बोले- बीजेपी के मंत्रियों की ये है हैसियत

अपने ही प्रशासन के खिलाफ धरने पर बैठे वन मंत्री संजय शर्मा, गहलोत बोले- बीजेपी के मंत्रियों की ये है हैसियत
राजनीति
12 Aug 2026, 03:28 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान वन मंत्री संजय शर्मा अलवर में जिला कलेक्टर और आयुक्त के खिलाफ धरने पर बैठ गए। ये पूरा मामला सफाई कर्मचारियों के नियुक्ति पत्र का था। ये कर्मचारी नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग नगर निगम से कर रहे थे। इन्होंने आयुक्त से अपने नियुक्ति पत्र पर साफ जवाब मांगा था। लेकिन इसी बीच आयुक्त के ट्रांसफर की खबर फैलते ही कर्मियों में रोष फैल गया और मामला वन मंत्री तक पहुंच गया।

6 महीने से सफाईकर्मियों को नहीं मिल रहा नियुक्ति पत्र

दरअसल बुधवार को ये सफाई कर्मी वन मंत्री संजय शर्मा के आवास गए थे। वहां उन्होंने अपनी परेशानियां सुनाईं और नगर निगम की शिकायत की। इसके बाद संजय शर्मा ने जिला कलेक्टर से बात भी की लेकिन कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकला। इसके बाद वे अलवर नगर निगम गए और वहां सफाई कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए।

यहां संजय शर्मा ने कहा कि नगर निगम और जिला कलेक्टर 6 महीने से सफाईकर्मियों की नियुक्ति पत्र क्यों रोक रहे हैं। जब सरकार से आदेश आ चुके हैं फिर क्या समस्या है इन्हें।

क्या है कर्मचारियों की समस्या

संजय शर्मा को इन सफाईकर्मियों ने बताया कि वे करीब 6 महीने से नियुक्ति पत्र के लिए जिला कलेक्टर और नगर निगम के अधिकारियों के लिए भटक रहे हैं। लेकिन अभी तक उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।

गहलोत बोले- सरकार में मंत्रियों की ये है हैसियत

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भाजपा सरकार में मंत्रियों की क्या हैसियत है, ये अलवर की तस्वीर ने पूरी तरह उजागर कर दिया है। सफाई कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र तक नहीं मिले, और वन मंत्री संजय शर्मा को अपनी ही सरकार के नगर निगम के सामने धरने पर बैठना पड़ा। एक कैबिनेट मंत्री को अपनी ही सरकार में जायज काम के लिए सड़क पर उतरना पड़े, सरकार का इससे बड़ा निकम्मापन और क्या होगा?

जिला कलेक्टर से बात की, फिर भी अफसरशाही ने मंत्री की एक नहीं सुनी। साफ है कि भाजपा राज में सरकार अफसरों के इशारे पर चलती है, मंत्री सिर्फ रबर स्टैंप बनकर रह गए हैं। जब कैबिनेट मंत्री ही व्यवस्था के आगे बेबस है, तो गरीब सफाई कर्मचारी और आम जनता की फरियाद कौन सुनेगा?

यह भाजपा सरकार की सबसे बड़ी शर्मिंदगी है, अपनी ही सरकार में अपने ही मंत्री को धरना देना पड़े। यह सुशासन नहीं, यह प्रशासनिक तंत्र के पूरी तरह भ्रष्ट और बेलगाम हो जाने की खुली स्वीकारोक्ति है। भाजपा सरकार को शर्म आनी चाहिए।


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