राजस्थान में क्यों फेल हुआ BJP का मुस्लिम दांव? क्या ओवैसी-बेनीवाल फैक्टर बना चुनौती

राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने मुस्लिम समाज के बीच राजनीतिक पहुंच बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में मुस्लिम चेहरों को मैदान में उतारा। पार्टी ने करीब 480 मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देने और इनमें से दो दर्जन से ज्यादा के जीतने का दावा किया गया है। इसकी सबसे ज्यादा चर्चा जयपुर नगर निगम में हो रही है, जहां बीजेपी ने मुस्लिम बहुल इलाकों में 8 मुस्लिम चेहरों को टिकट दिया। लेकिन इनमें से वार्ड 146 की प्रत्याशी अफसाना नामांकन दाखिल नहीं कर सकीं। मैदान में उतरे बाकी सातों प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। यानी जयपुर में बीजेपी का मुस्लिम प्रत्याशियों के जरिए मुस्लिम बहुल वार्डों में सेंध लगाने का प्रयोग सीट में तब्दील नहीं हो सका।
जयपुर में 8 टिकट, मैदान में 7, जीत जीरो
बीजेपी ने जयपुर नगर निगम के मुस्लिम प्रभाव वाले वार्डों में जाकिर खान कायमखानी, शबाब जहां उर्फ शब्बो, माजिद खान उर्फ पठान, शाहनवाज अंसारी, मिजाना मिर्जा, रहीस मंसूरी और फरीदुद्दीन 'जैकी' समेत मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था।
वार्ड 19 में शाहनवाज अंसारी ने 3,118 वोट हासिल किए और कांग्रेस के मो. फारूख से 463 वोट से हार गए। बाकी मुस्लिम प्रत्याशियों को भी अपने-अपने वार्ड में जीत नहीं मिली। दूसरी तरफ जयपुर के वार्ड 146 में AIMIM समर्थित फिरोजा बानो ने जीत दर्ज की। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने करीब 1,975 वोटों के अंतर से चुनाव जीता। यहीं से बीजेपी की रणनीति और ओवैसी की एंट्री को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई।
क्या बीजेपी को ओवैसी-बेनीवाल गठबंधन की चिंता थी?
इस चुनाव से पहले राजस्थान की राजनीति में एक नया समीकरण बना। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM और हनुमान बेनीवाल की RLP ने निकाय चुनाव में गठबंधन किया। बेनीवाल ने इस गठबंधन को जाट-मुस्लिम राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया था। AIMIM ने गठबंधन के तहत 5 सीटों पर चुनाव लड़ा और 2 सीटें जीतने में सफल रही, एक जयपुर और एक झुंझुनूं में।
ऐसे में ये सवाल उठता है कि क्या बीजेपी ने भी मुस्लिम प्रत्याशियों को बड़ी संख्या में टिकट देकर इस नए राजनीतिक समीकरण का मुकाबला करने की कोशिश की थी? इस संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, हालांकि बीजेपी ने कभी आधिकारिक तौर पर इस बात को स्वीकार नहीं किया है।
बीजेपी ने क्या वजह बताई?
बीजेपी के प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देने के पीछे अलग तर्क दिया था। उन्होंने कहा कि बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे की तरफ से मुस्लिम दावेदारों के नाम सुझाए गए थे और पार्टी ने उनकी सिफारिश को माना। उनके मुताबिक इस बार मुस्लिम समुदाय के कई लोगों ने बीजेपी से टिकट मांगा था। बगड़ी ने ये भी दावा किया कि पार्टी के पास मुस्लिम दावेदारों के बड़ी संख्या में आवेदन आए और जीतने की क्षमता वाले उम्मीदवारों को टिकट दिया गया।
जयपुर के नतीजे बीजेपी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत जरूर देते हैं। पार्टी ने जिन मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम चेहरों को उतारा, वहां केवल समुदाय विशेष का उम्मीदवार उतारना जीत की गारंटी नहीं बना।
दूसरी तरफ AIMIM ने जयपुर में पहली बार जीत दर्ज की। यानी एक तरफ बीजेपी के 7 मुस्लिम प्रत्याशी जीत नहीं पाए, तो दूसरी तरफ ओवैसी की पार्टी ने उसी चुनाव में अपना खाता खोल दिया।
विधानसभा-लोकसभा से निकाय तक बदली तस्वीर
इस चुनाव से पहले बीजेपी ने 2023 के राजस्थान विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव में कोई मुस्लिम उम्मीदवार मैदान में नहीं उतारा था। इसके मुकाबले जयपुर निकाय चुनाव में 8 मुस्लिम चेहरों को टिकट देना पार्टी की उम्मीदवार चयन रणनीति में स्पष्ट बदलाव को दिखाया।
बीजेपी के लिए सवाल अब ये है कि क्या स्थानीय निकाय स्तर पर मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट देने का ये नया प्रयोग आगे भी जारी रहेगा या ये रणनीति केवल उन वार्डों तक सीमित रहेगी जहां मुस्लिम मतदाता चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण हैं।
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