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राजस्थान निकाय चुनाव: पार्षदों की बाड़ेबंदी में पुलिस की एंट्री, अलवर से मंडावा तक सियासी घमासान, कांग्रेस ने लगाए दबाव के आरोप

राजस्थान निकाय चुनाव: पार्षदों की बाड़ेबंदी में पुलिस की एंट्री, अलवर से मंडावा तक सियासी घमासान, कांग्रेस ने लगाए दबाव के आरोप
राजनीति
17 Sept 2026, 02:25 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद अब मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष की कुर्सी को लेकर सियासी जोड़-तोड़ तेज हो गई है। इसी बीच कई निकायों में पार्षदों की बाड़ेबंदी और पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अलवर से लेकर झुंझुनूं के मंडावा, नीमराना, धोद, लोसल और टोंक के दूनी तक कांग्रेस ने पुलिस-प्रशासन के जरिए अपने या समर्थित पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। पुलिस और प्रशासन की तरफ से कुछ मामलों में कार्रवाई को शिकायत और कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

मंडावा के होटल में पहुंची 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम

सबसे ज्यादा चर्चा झुंझुनूं के मंडावा की है। यहां मलसीसर नगरपालिका के कांग्रेस पार्षदों को चेयरमैन चुनाव से पहले एक होटल में ठहराया गया था। 16 सितंबर को दोपहर करीब 2 बजे 50 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की टीम होटल पहुंची और कमरों की तलाशी ली। इस दौरान मंडावा विधायक रीटा चौधरी भी होटल में मौजूद थीं।

कांग्रेस ने पुलिस की इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पार्षदों को होटल से बाहर निकालने या उन पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। मंडावा विधायक ने भी पुलिस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक दबाव से जोड़कर देखा।

हालांकि पुलिस ने राजनीतिक दबाव के आरोपों को खारिज किया है। झुंझुनूं ग्रामीण DSP नरेंद्र सिंह के मुताबिक मलसीसर नगरपालिका के वार्ड नंबर-3 के पार्षद संतु नाई के परिजनों ने शिकायत दी थी कि उन्हें बंधक बनाकर रखा गया है। इसके बाद मलसीसर SDM की तरफ से सर्च वारंट जारी किया गया और पुलिस उसी के आधार पर होटल पहुंची। पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान संतु नाई होटल में नहीं मिले और किसी दूसरे पार्षद को हिरासत में नहीं लिया गया।

राजस्थान की जनता ने सत्ता का ऐसा तांडव पहले कभी नहीं देखा...
अब मलसीसर (मंडावा), झुंझुनूं में देखिए.. शिकायत और सर्च वारंट के नाम पर कैसे पुलिस कांग्रेस के निर्वाचित पार्षदों पर दबाव बनाकर उन्हें जबरन साथ ले जानी की कोशिश कर रही है।
जिस जनता ने भाजपा को नकार दिया, वो अब बोर्ड… pic.twitter.com/LcNezFTw4R
— Govind Singh Dotasra (@GovindDotasra) September 17, 2026

मंडावा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत

मंडावा नगरपालिका के चुनावी गणित ने भी इस विवाद को अहम बना दिया है। मंडावा नगरपालिका में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव परिणाम में कांग्रेस ने 16 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी को 6 और निर्दलीयों को 3 सीटें मिलीं। बोर्ड बनाने के लिए 13 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। यानी कांग्रेस के पास बहुमत से तीन सीट ज्यादा हैं। यही वजह है कि कांग्रेस की तरफ से सवाल उठाया जा रहा है कि जब उसके पास स्पष्ट बहुमत है तो उसके पार्षदों की बाड़ेबंदी के दौरान पुलिस कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी। हालांकि पुलिस का पक्ष है कि होटल में कार्रवाई किसी राजनीतिक समीकरण के लिए नहीं, बल्कि एक पार्षद के परिजनों की शिकायत के आधार पर की गई थी।

अलवर में भी बाड़ेबंदी वाले रिसॉर्ट में पहुंची पुलिस

अलवर में भी निकाय चुनाव के बाद बाड़ेबंदी को लेकर विवाद सामने आया। रामगढ़ नगरपालिका के कांग्रेस और कांग्रेस समर्थित निर्दलीय पार्षदों को धवाला रिसॉर्ट में ठहराया गया था। 13 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक देर रात पुलिस वहां पहुंची थी। पुलिस के पहुंचने के बाद करीब एक घंटे तक हाईवोल्टेज स्थिति बनी रही।

इससे पहले अलवर नगर निगम के कांग्रेस प्रत्याशियों को भी चुनाव परिणाम से पहले होटल में ठहराए जाने की जानकारी सामने आई थी। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और कांग्रेस नेताओं ने इसे बोर्ड बनाने की रणनीति का हिस्सा बताया था।

अलवर में बाड़ेबंदी को लेकर एक अन्य घटनाक्रम में वार्ड 22 के निर्दलीय प्रत्याशी कुलदीप मीणा ने होटल में तबीयत खराब होने और इलाज नहीं मिलने की बात कही। उनके परिवार के संपर्क करने के बाद पुलिस के साथ परिजन होटल पहुंचे और वे अलवर लौटे। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी के लोगों ने पुलिस की मदद से उन्हें जबरन ले जाने की कोशिश की, जबकि बीजेपी पक्ष ने कहा कि वे अपनी इच्छा से उनके साथ आए।

नीमराना, धोद, लोसल और दूनी में भी आरोप

मंडावा और अलवर के अलावा नीमराना में भी अध्यक्ष चुनाव से पहले विवाद सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक एक महिला पार्षद के परिजन और होटल संचालक को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद मामला गरमा गया और ग्रामीणों ने थाने का घेराव किया। कांग्रेस ने इसे भी पार्षदों पर दबाव बनाने से जोड़ा।

सीकर के धोद और लोसल तथा टोंक जिले के दूनी में भी कांग्रेस ने अपने और समर्थित पार्षदों पर पुलिस-प्रशासन के जरिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं। दूसरी तरफ प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई को शिकायत के बाद कानूनी प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है।

कांग्रेस ने लगाए गंभीर आरोप, बीजेपी ने खारिज किया

इन घटनाओं को लेकर कांग्रेस ने प्रदेश सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा है। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली आरोप है कि जहां बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है, वहां कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को प्रभावित करने के लिए पुलिस-प्रशासन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए आरोप लगाया कि निकाय बोर्ड बनाने के लिए पुलिस-प्रशासन का दुरुपयोग किया जा रहा है और पार्षदों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है।

PCC चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि जिस जनता ने भाजपा को नकार दिया, वो अब बोर्ड बनाने के लिए पुलिस-प्रशासन और सरकारी तंत्र के जरिए जनादेश लूटने में लगी है। CMO में बैठे अधिकारी भाजपा का बोर्ड बनाने के लिए जिलों के अधिकारियों को धमका रहे हैं, सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं।

बीजेपी ने आरोप किए खारिज

हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि दोनों प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं और कांग्रेस चुनावी हार के बाद इस तरह के आरोप लगा रही है।

21 सितंबर को तय होगी कई निकायों की सत्ता

राजस्थान निकाय चुनाव में पार्षदों के परिणाम आने के बाद अब अगली बड़ी परीक्षा मेयर, सभापति और नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव की है। 21 सितंबर को कई निकायों में प्रमुख पदों के लिए चुनाव होना है। ऐसे में परिणाम और अध्यक्ष चुनाव के बीच का समय राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।

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