RCA Elections: राजस्थान के क्रिकेटर के हाथ में क्यों नहीं RCA की कमान, एसोसिएशन में क्रिकेट या सियासत?

राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी RCA के चुनाव 29 सितंबर को होने वाले हैं। जिसके लिए गहगहमी शुरु हो गई है। और तो और बाड़ेबंदी भी शुरु हो गई है। 20 से ज्यादा जिला संघ सचिवों को जयपुर में दिल्ली रोड के एक होटल में ठहराए जाने की चर्चा है। इसकी तस्वीरें भी वायरल हो रही हैं। RCA के पुराने चुनावों में भी जिला पदाधिकारियों की बाड़ेबंदी की रिपोर्ट सामने आती रही है।
RCA की पिच पर नेतापुत्रों की लॉबिंग
RCA चुनाव क्रिकेट कम और सियासत ज्यादा नजर आ रही है। RCA की पिच पर नेता पुत्रों की लॉबिंग, जिला संघों के वोटों का गणित और बाड़ेबंदी की चर्चाओं ने मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है। इसलिए यहां एक सवाल उठता है कि—राजस्थान क्रिकेट की कमान आखिर क्रिकेटरों के हाथ में क्यों नहीं है? और दूसरा सवाल—RCA में वोटर और उम्मीदवार बनने के नियम इतने अलग क्यों हैं?
ये नेतापुत्र चुनावी दौड़ में!
दरअसल इस चुनाव में राजनीतिक परिवारों से जुड़े 7 नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे मोहित यादव, स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर के बेटे धनंजय सिंह खींवसर, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी के बेटे आशीष तिवाड़ी, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह राठौड़, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के बेटे पवन दिलावर, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय के बेटे प्रेम प्रताप मालवीय, और मंत्री ओटाराम देवासी के बेटे विक्रम देवासी।
इनमें से कई नाम सिर्फ चर्चा में ही नहीं हैं, बल्कि 22 सितंबर को जारी RCA की आधिकारिक जिला संघ पदाधिकारी की लिस्ट में भी अलग-अलग जिला संघों के पदों पर दर्ज हैं। यानी RCA में एंट्री का रास्ता जिला क्रिकेट संघों से होकर जाता है… और यहीं से शुरू होता है असली वोट का खेल।
राजेंद्र राठौड़ और गजेंद्र खींवसर के बेटों के मुकाबले की चर्चा
अध्यक्ष पद पर फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा है पराक्रम सिंह राठौड़ और धनंजय सिंह खींवसर के नाम की। एक तरफ पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ का राजनीतिक परिवार…दूसरी तरफ मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का परिवार। लेकिन इस मुकाबले में सिर्फ दो नाम नहीं हैं। मोहित यादव, जो भाजपा विधायक जसवंत यादव के बेटे हैं और RCA की एडहॉक कमेटी के कन्वीनर भी रह चुके हैं, उनका नाम भी अध्यक्ष पद की संभावित दौड़ में चर्चा में है।
और अब जरा RCA की मौजूदा एडहॉक कमेटी देखिए। कन्वीनर मोहित यादव, सदस्य धनंजय सिंह खींवसर, आशीष तिवाड़ी, अरिष्ट सिंघवी जो पूर्व मंत्री चंद्रराज सिंघवी के पोते हैं, अर्जुन बेनीवाल जो विधायक संजीव बेनीवाल के बेटे हैं। और सुशील जैन जो डूंगरपुर जिला क्रिकेट संघ के सचिव हैं। यानी जिस कमेटी ने लंबे समय तक RCA का अंतरिम प्रशासन संभाला, उसमें भी राजनीतिक परिवारों से जुड़े कई चेहरे रहे हैं।
RCA चुनाव में कौन करेगा वोट?
लेकिन यहां एक बेहद दिलचस्प बात समझिए। RCA चुनाव में हर बड़ा नाम वोटर नहीं है। 22 सितंबर की अंतिम वोटर लिस्ट में कुल 38 वोटर हैं—36 जिला क्रिकेट संघों के प्रतिनिधि और दो पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी, गगन खोड़ा और पंकज सिंह। जिला संघ का वोट उसके सचिव के पास है। लेकिन जिला संघ का अध्यक्ष—अगर वो पात्र है तो RCA के पद के लिए चुनाव लड़ सकता है।
यानी जिसके पास वोट नहीं है, वह उम्मीदवार हो सकता है… और जिसके पास वोट है, वो जरूरी नहीं कि उसी पद का उम्मीदवार हो। यही RCA चुनाव का सबसे बड़ा पेच है। तो सवाल उठता है कि अगर राजस्थान के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर RCA के वोटर हो सकते हैं, तो क्या उन्हें RCA की कमान संभालने का मौका नहीं मिलना चाहिए?
क्या क्रिकेटर भी लड़ सकते हैं चुनाव
यहां भी एक तथ्य साफ कर दें कि मौजूदा RCA संविधान पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को राजस्थान RCA की सदस्यता और वोट का अधिकार देता है और Article 26 की शर्तें पूरी करने पर उन्हें ऑफिस-बियरर यानी पदाधिकारी बनने के लिए भी पात्र बताता है।
लेकिन मौजूदा चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए संवैधानिक पात्रता और नामांकन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। और यही वो जगह है जहां बहस पैदा होती है कि क्या क्रिकेट चलाने का अनुभव क्रिकेट खेलने से आना चाहिए, या क्रिकेट संघ चलाने से?
तो 29 सितंबर को मुकाबला सिर्फ RCA अध्यक्ष का नहीं होगा। मुकाबला होगा 36 जिला संघों के वोटों, दो पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की मौजूदगी, राजनीतिक परिवारों की सक्रियता और क्रिकेट प्रशासन के मॉडल के बीच। नामांकन 26 सितंबर तक, स्क्रूटिनी 27 को, नाम वापसी 28 को… और 29 सितंबर को तय होगा कि राजस्थान क्रिकेट की अगली पारी किसके हाथ में जाती है।
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