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भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर पाथेय भवन में नाट्य मंचन और संगोष्ठी आयोजित, प्रांत प्रचारक बोले- 'हमारे आसपास हर दिन विभाजन हो रहा'

भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर पाथेय भवन में नाट्य मंचन और संगोष्ठी आयोजित, प्रांत प्रचारक बोले- 'हमारे आसपास हर दिन विभाजन हो रहा'
राजस्थान
14 Aug 2026, 07:10 pm
रिपोर्टर : Rakesh Choudhary1

अखिल भारतीय साहित्य परिषद् ,जयपुर द्वारा 'भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस ' पर हुए समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विख्यात लेखक और विचारक होनगासंद्र वेंकटरमय्या शेषाद्रि की प्रसिद्ध ऐतिहासिक कृति 'और देश बंट गया ' पर आधारित नाटिका का मंचन और संगोष्ठी का आयोजन जयपुर के पाथेय भवन स्थित नारद सभागार ने हुआ।

परिषद् के प्रदेश संयुक्त महामंत्री डॉ ओम प्रकाश भार्गव ने बताया कि आगामी लोकमंथन समारोह की कड़ी में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में प्रदेश भर के कई लेखक, शिक्षाविद् और पत्रकार बंधु उपस्थित रहे। बाबू लाल जी ने अपने व्याख्यान में अखंड भारत की परिकल्पना से प्रारंभ करते हुए कहा कि भारत के विभाजन की त्रासदी ऐतिहासिक रूप से 1947 में अवश्य हुई लेकिन उसके बाद आज भी भारत की धरती पर कई तरह का विभाजन हो रहा है।

फिल्मों में मुसलमानों की नृशंसता नहीं दिखाई

उन्होंने इतिहास के पूरे परिदृश्य पर हिंदुओं की सहिष्णुता और विधर्मियों की अमानवीयता के बारे में बताया। उन्होंने भारत विभाजन के पहले की पृष्ठभूमि के बारे में तात्कालिक विभाजन में पाकिस्तान में हिंदू महिलाओं और बच्चों पर हुए अमानवीय अत्याचार और व्यापक स्तर पर हुए हिंदू नरसंहार के कुछ लोमहर्षक किस्से सुनाते हुए कहा कि कश्मीर फाइल और केरला फाइल में उनका आंशिक उल्लेख हुआ है। भारतीय फिल्मों में अभी तक मुसलमानों की नृशंसता का रेखांकन नहीं हुआ है।

उन्होंने भारत विभाजन में मुस्लिम लीग और कांग्रेस के मिले जुले षड्यंत्र के बारे में कहा कि तात्कालिक नेता महात्मा गांधी और नेहरू ने पाकिस्तान निर्माण के बाद केवल अपनी विवशता प्रकट की थी। प्रांत प्रचारक ने भारत में हिंदुओं की जनसंख्या दर में हो रही कमी पर चिंता जताते हुए कहा कि आज भारत में सनातन धर्म की प्रजनन क्षमता कम हुई है यह भविष्य के लिए एक बड़े संकट का संकेत है। इससे हमारे राष्ट्र का सनातन नेतृत्व प्रभावित होगा।

युवा पीढ़ी जीवन मूल्यों को भूल रही

सनातन धर्म की युवा पीढ़ी अपने विरासत में मिले जीवन मूल्यों को भूल रही है। उन्होंने हाल ही में जंतर मंतर दिल्ली में हुए जेन जी आंदेलन में राष्ट्र विरोधी समाज कंटकों के नकारात्मक कुचक्र से सभी को सचेत करते हुए कहा कि हम में से सनातनी का यह दायित्व है कि हम अपने जीवन मूल्यों को दृढ़ता के साथ पालन करते हुए राष्ट्र प्रथम की भावना के साथ जीना होगा तभी राष्ट्र अखंड और सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि हमे अपने आसपास देखने की आवश्यकता है जहाँ हर दिन विभाजन हो रहा है। इस अवसर पर दिल्ली की अदिति महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा नाट्य प्रस्तुति 'और देश बंट गया ' प्रस्तुत किया गया जिसमें भारत विभाजन की त्रासदी के मार्मिक दृश्य को देखकर सभागार में उपस्थित सभी दर्शकों ने सराहा।।

साहित्य परिषद् नवाचारों को अपना रही

संगोष्ठी में परिषद् के प्रदेश महामंत्री श्री विष्णु शर्मा हरिहर अपने बीज वक्तव्य में कहा कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद् अपनी स्थापना से आज तक नवाचारों को अपना रही है। उन्होंने हाल में में निर्मित लोक साहित्य,युवा साहित्य और बाल साहित्य प्रकोष्ठ का उल्लेख किया जिसमें युगानुरूप राष्ट्रीयता से ओतप्रोत साहित्य लेखन और संरक्षण का कार्य हो रहा है। संगोष्ठी में स्वागताध्यक्ष राधा गोविंद करोल में सभी अतिथियों का आभार ज्ञापन किया।

इस अवसर पर साहित्य परिषद् के प्रदेश संगठन मंत्री डॉ विपिनचंद्र,मूल चन्द जी आर्य,पाथेय कण के सहायक संपादक श्याम सिंह, प्रो नंद किशोर पाण्डेय, डॉ इंदु शेखर तत्पुरुष, प्रो अल्पना कटेजा,डॉ जितेंद्र कुमार सिंह की गरिमामय उपस्थिति रही।


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