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जयकृष्ण पटेल पर फर्जी डिग्री का आरोप, पहले रिश्वत मामला अब ये...आखिर ये हो क्या रहा है?

जयकृष्ण पटेल पर फर्जी डिग्री का आरोप, पहले रिश्वत मामला अब ये...आखिर ये हो क्या रहा है?
राजस्थान
13 Jun 2026, 04:23 pm
रिपोर्टर : ज्योति शर्मा

Jaikrishna Patel: राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बागीदौरा से भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP के विधायक जयकृष्ण पटेल अब फर्जी डिग्री मामले में जांच के घेरे में हैं। आरोप है कि उन्होंने शिक्षक भर्ती में कथित तौर पर BA की फर्जी डिग्री का इस्तेमाल किया था और अब SOG इस पूरे मामले की जांच कर रही है। ACB ने इस पर केस दर्ज कर लिया है।

जयकृष्ण पटेल आदिवासी बहुल बागीदौरा सीट से विधायक हैं और भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP राजस्थान की राजनीति में तेजी से उभरती हुई ताकत मानी जा रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके शपथ पत्र और पुराने रिकॉर्ड में डिग्रियों को लेकर विसंगतियां सामने आई हैं।

SOG ने किया खुलासा

SOG ADG विशाल बंसल ने खुलासा किया कि जयकृष्ण पटेल ने राजस्थान, गुजरात और सिक्किम से जुड़े एकेडमिक दस्तावेजों का सहारा लिया था। उन्होंने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय में 2007 से 2010 के बीच रेगुलर स्टूडेंट के तौर पर एडमिशन लिया था। दूसरे साल में वे इंग्लिश सब्जेक्ट में फेल हो गए। इसी बीच उन्होंने सिक्किम की एक यूनिवर्सिटी से बीए की डिग्री लेने का दावा भी किया था , इसके बाद 2012 में गुजरात की भी एक यूनिवर्सिटी से भी डिग्री लेने की बात कही।

फिर राजस्थान में शिक्षक भर्ती में इन्हीं डिग्रियों का इस्तेमाल किया और नौकरी पाई। लेकिन इसकी शिकायत शिक्षा विभाग के पास गई। तब इनके दस्तावेजों का वेरिफिकेशन होना शुरू हुआ। इसकी भनक लगते ही जयकृष्ण पटेल ने 2023 में शिक्षक पद से इस्तीफा ही दे दिया। हालांकि वो इससे पहले 5 साल तक टीचर की पोस्ट पर काम कर चुके थे और सरकार से वेतन भी पा रहे थे। जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुई हैं।

पहले रिश्वत के आरोपों से घिर चुके

हालांकि ये पहला मौका नहीं है जब जयकृष्ण पटेल किसी विवाद में घिरे हों। इससे पहले उन पर विधानसभा में खनन से जुड़े सवाल वापस लेने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। एसीबी ने उन्हें गिरफ्तार भी किया था और मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा। लेकिन जयकृष्ण पटेल और उनके समर्थकों का दावा रहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप राजनीतिक प्रेरित थे। बाद में उन्होंने जांच एजेंसियों और विधानसभा की समितियों के सामने अपनी बेगुनाही के पक्ष में दस्तावेज भी पेश किए थे। हालांकि इस मामले में तो उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई थी।

ये कानूनी कार्रवाई या राजनीति रणनीति

इधर राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग सवाल उठा रहा है कि क्या ये सिर्फ कानूनी कार्रवाई है या फिर इसके पीछे राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहे हैं? वजह ये है कि पिछले कुछ सालों में BAP तीसरे राजनीतिक विकल्प के तौर पर अपनी मौजूदगी मजबूत दावेदारी कर है। आदिवासी इलाकों में BAP का प्रभाव बढ़ा है।

फिलहाल जयकृष्ण पटेल पर लगे फर्जी डिग्री के आरोपों की जांच जारी है और सच जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। लेकिन इतना तय है कि इस पूरे घटनाक्रम ने राजस्थान की राजनीति में एक नया सवाल खड़ा कर दिया है।


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