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BJP से आदिवासियों का वोट छीनेगा मानगढ़ धाम? केंद्र के फैसले से क्या भड़क सकता है आदिवासी समुदाय?

BJP से आदिवासियों का वोट छीनेगा मानगढ़ धाम? केंद्र के फैसले से क्या भड़क सकता है आदिवासी समुदाय?
राजस्थान
04 Aug 2026, 03:36 pm
रिपोर्टर : Jyoti Sharma

राजस्थान के बांसवाड़ा में स्थित ऐतिहासिक मानगढ़ धाम-जिसे 'आदिवासी जलियांवाला बाग' कहा जाता है, जहां 1913 में 1,500 से ज़्यादा आदिवासी वीरों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी, आज उसी मानगढ़ धाम को लेकर संसद के भीतर से एक ऐसी ख़बर आई जिसने पूरे वागड़ अंचल में सियासी भूचाल ला दिया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कह दिया है कि मानगढ़ धाम को 'राष्ट्रीय स्मारक' घोषित नहीं किया जा सकता।

लोकसभा में बेनीवाल के सवाल पर सरकार का लिखित जवाब

राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में लिखित सवाल पूछा था कि क्या मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित करने की कोई योजना है? इसके जवाब में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने संसद में लिखित बयान दिया कि AMASR Act के मापदंडों के तहत मानगढ़ धाम पर बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण और बदलाव हुए हैं। इस वजह से ये स्थल अपनी मूल पुरातात्विक विशेषताओं और प्रामाणिकता को खो चुका है और राष्ट्रीय स्मारक बनने योग्य नहीं है।

बेनीवाल बोले- ये आदिवासियों का अपमान

इस पर हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया पर मोदी सरकार और गजेंद्र सिंह शेखावत पर तीखा हमला बोला। बेनीवाल ने कहा कि- नवंबर 2022 में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानगढ़ धाम पहुंचे थे और आदिवासियों के बलिदान को नमन किया था। तब आदिवासियों को उम्मीद जगी थी कि मानगढ़ को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा मिलेगा। लेकिन आज केंद्र का यह जवाब 1,500 आदिवासी शहीदों की शहादत और पूरे आदिवासी समुदाय का अपमान है।

दरअसल राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों आदिवासियों के लिए मानगढ़ धाम केवल एक पहाड़ी नहीं, आस्था और स्वाभिमान का प्रतीक है। केंद्र के इस इनकार से दक्षिण राजस्थान के आदिवासियों में भारी आक्रोश है वही बांसवाड़ा से भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के सांसद राजकुमार रोत इस मुद्दे को किस तरह लेते हैं, इस पर पूरे प्रदेश की जनता की नजरें हैं।

बीजेपी को आदिवासी दे सकते हैं झटका?

भाजपा पिछले कुछ वर्षों से वागड़ और मेवाड़ क्षेत्र में आदिवासियों को साधने की पुरजोर कोशिश कर रही थी। लेकिन राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा न मिलने से भाजपा का आदिवासी वोटबैंक खिसक सकता है, जिसका सीधा सियासी फायदा राजकुमार रोत को मिलना तय माना जा रहा है।

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