भैराणा में संतों की जीत लेकिन बेनीवाल को CM भजनलाल को अपशब्द कहना पड़ गया भारी, अब सियासत से बैन होंगे?

Hanuman Beniwal on CM Bhajan Lal Sharma: राजस्थान की सियासत में इस वक्त बयानों के ऐसे तीर चल रहे हैं, जिसने पूरे मरुधरा के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। जी हां, 'भैराणा धाम रीको विवाद' में संतों की महापंचायत में गए सांसद हनुमान बेनीवाल ने अपनी सियासत को चमकाने के लिए इतने बड़बोले बोल दिए कि राजस्थान में विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल बेनीवाल ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को मूर्ख और मूर्खों का राजा, मूर्खाधिराज जैसे आपत्तिजनकर टिप्पणी कर दी थी। जिसके बाद बीजेपी ने कड़ा विरोध जताया। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने तो बेनीवाल को बैन तक करने की मांग कर दी।
दूदू जिले के भैराणा धाम में संतों की मांगें उठाने के लिए बेनीवाल ने इतना बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। बेनीवाल ने यहां पर कहा कि सरकार जनता की ताकत को नहीं समझ रही है और जितने भी मूर्ख हैं, उनके राजा भजनलाल हैं।
बैन हों बेनीवाल- मदन राठौड़
मुख्यमंत्री पर इतनी अमर्यादित टिप्पणी के बाद बीजेपी खामोश नहीं रही। प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने 11 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बेनीवाल को 'सुपर गुंडा' कह डाला। राठौड़ ने कहा कि टीआरपी बढ़ाने के लिए राजनेता अब गुंडों की तरह हफ्ता वसूली वाली भाषा बोल रहे हैं। इन्हें संस्कार सीखने की जरूरत है और मीडिया को ऐसे नेताओं को बैन कर देना चाहिए।
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता और पूर्व चौमूं विधायक रामलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान की जनता अच्छे से जानती है कि बेनीवाल किस नशे में होकर ऐसे भाषण देते हैं। शायद उन्हें मुगालता है कि केवल उनकी मां ने ही दूध पिलाया है। RLP पहले ही विधानसभा में 'जीरो' पर आ चुकी है, अब ऐसे स्तरहीन बयानों से पार्टी रसातल में चली जाएगी।
गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने कहा कि हनुमान बेनीवाल का बयान बेतुका है, जो भाषा उन्होंने बोली है मुझे लगता है कि वो नशे करते हैं और आपको थोड़ा बहुत ज्ञान होना चाहिए आप एक सांसद हैं।
भैराणा धाम में संतों की मांगों का क्या हुआ?
दरअसल बीते दिन भर चले प्रदर्शन के बाद जब हनुमान बेनीवाल और प्रशासन के बीच संतों की मांगों पर सहमति नहीं बनी तब बेनीवाल ने अपने समर्थकों के साथ जयपुर कूच का ऐलान किया देर रात जयपुर कूच के दौरान पुलिस ने बेनीवाल के काफिले को मौखमपुरा मोड़ पर रोक दिया। जिसके बाद IG राहुल प्रकाश और जयपुर कलेक्टर संदेश नायक ने संतों की संघर्ष समिति और रीको अधिकारियों की बैठक कराई और खुद भी इस मीटिंग में शामिल हुए। काफी देर बाद फिर इस बात पर सहमति बनी कि इस विवाद को निपटाने के लिए एक कमेटी बनाई जाएगी और भैराणा पर जो रीको सड़क योजना प्रस्तावित की गई है उसे फिर से रिडिजाइन किया जाएगा।
इसमें रि-डिजाइनिंग के लिए जो कमेटी बनाई जाएगी उसमें संतों की संघर्ष समिति के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। एक महीने में ये कमेटी पूरी रिपोर्ट सरकार को सौपेगी। वहीं प्रशासन के साथ संघर्ष समिति की बातचीत में 7 में से 5 मुद्दों पर सहमति बनने की भी बात कही जा रही है।
क्या मांग है भैराणा धाम के संतों की?
भैराणा धाम में संतों का ये आक्रोश RIICO के नई सड़क योजना के खिलाफ था, जो भैराणा धाम के पास की जमीन पर बन रहा था। संतों का कहना है कि इससे औद्यौगिक प्रदूषण होगा, जिससे यहां का आध्यात्मिक, पर्यावरणीय क्षय होगा। हजारों की संख्या में पेड़ काटे गए हैं। इन संतों का कहना है कि धाम विकास के नाम पर इस धाम की शांति, पर्यावरण को खत्म किया जा रहा है। यहां के आध्यात्मिक स्वरूप को तहस-नहस किया जा रहा है। उनका कहना है कि इस तरह के अंधाधुंध विकास के लिए वे 40 हजार पेड़ों की बलि कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते। इससे यहां के पशु-पक्षियों के जीवन खत्म हो जाएगा। शुद्ध पानी नहीं बचेगा। ये लडाई सिर्फ जमीन की नहीं है बल्कि धर्म की है, आध्यात्म की है, आने वाली पीढ़ियों के जीवन बचाने की है।
अब आगे क्या होगा?
भैराणा धाम में संतों के अग्नितप के बाद सरकार ने एक प्रस्ताव भेजा था जिसमें सराकर ने भैराणा धाम के लिए 150 बीघा के साथ आस-पास की 100 बीघा जमीन छोड़ने का प्रस्ताव दिया था। जिस पर संतों का साफ इनकार था। संतों की मांग था कि पूरे भैरणा धाम यानी दादू तपोवन क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाए और यहां से रीको की परियोजना हटाई जाए। बेनीवाल ने कहा कि सरकार ने 800 बीघा जमीन पर RIICO का काम रोक दिया है। 2 प्लॉट डेयरी वाले भी रोक दिए हैं। विवाद निपटाने वाली समिति रिपोर्ट देगी और RIICO के निरस्तीकरण का काम शुरू होगा। लगभग कई मांगें मान ली हैं।
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