नागौर में बेनीवाल का मुस्लिम प्रेम फिर चर्चा में, पटाखा फैक्ट्री में धमाके से जाट-मुस्लिम सियासत को हवा!

Hanuman Beniwal: राजस्थान की राजनीति में नागौर सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल इन दिनों मुस्लिम समाज के प्रति अपने बयानों और राजनीतिक सक्रियता को लेकर चर्चा में हैं। नागौर के बड़ली इलाके में पटाखों के गोदाम में हुए भीषण हादसे में दो युवकों की मौत के बाद बेनीवाल घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, मुस्लिम समाज के लोगों को गले लगाया और मृतकों की नमाज-ए-जनाजा में भी शामिल हुए। इस दौरान उनका एक बयान भी चर्चा का विषय बन गया।
बेनीवाल ने हिंदू-मुस्लिम राजनीति करने वालों को निशाने पर लेते हुए कहा कि भारत के मुसलमान अपनी जान हथेली पर रखकर पटाखा फैक्ट्रियों में काम करते हैं। पटाखे बनाने के काम में बड़ी संख्या में मुस्लिम कामगार लगे हुए हैं। ऐसे वक्त में हिंदू-मुस्लिम करने के बजाय लोगों की मदद करना और पीड़ित परिवारों के साथ खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने इसे अपनी ड्यूटी बताया।
मुस्लिम समाज के प्रति बेनीवाल की बढ़ती नजदीकी
बेनीवाल का ये पहला मौका नहीं है, जब उन्होंने मुस्लिम समाज के प्रति खुलकर समर्थन जताया हो। इससे पहले भी वह कई मौकों पर मुस्लिम समाज के बीच पहुंचकर अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज करा चुके हैं। ईद के मौके पर मुंडवा में दरगाह पहुंचकर उन्होंने मुस्लिम समाज को संबोधित किया था और भरोसा दिलाया था कि जरूरत पड़ने पर वो उनके साथ खड़े रहेंगे।
इतना ही नहीं, सितंबर 2026 में बेनीवाल ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ मंच साझा किया था। RLP और AIMIM के बीच निकाय चुनावों को लेकर गठबंधन भी हुआ। इस दौरान बेनीवाल ने जाट-मुस्लिम एकजुटता की बात करते हुए कहा था कि जाट और मुस्लिम पहले भी साथ रहे हैं और आगे भी यह साथ बना रहेगा। उन्होंने इस गठबंधन को बीजेपी और कांग्रेस के सामने तीसरे राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश किया था।
जाटों के साथ मुस्लिम समाज को भी साधने की कोशिश?
बेनीवाल की राजनीति को लंबे समय तक जाट समुदाय के प्रभाव और समर्थन से जोड़कर देखा जाता रहा है। लेकिन अब उनकी राजनीतिक गतिविधियों में मुस्लिम समाज के साथ नजदीकी और जाट-मुस्लिम एकजुटता का मुद्दा भी प्रमुखता से दिखाई दे रहा है। सार्वजनिक मंचों से जाट और मुस्लिम समाज की तुलना को लेकर दिए गए उनके बयानों ने भी राजनीतिक चर्चाओं को हवा दी है। बेनीवाल के बयानों और ओवैसी के साथ गठबंधन को देखते हुए सवाल उठ रहा है कि क्या RLP अब अपने पारंपरिक राजनीतिक आधार से आगे बढ़कर मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी अपनी मजबूत जमीन तैयार करना चाहती है?
फिलहाल बेनीवाल के इन कदमों को सामाजिक भाईचारे की राजनीति कहा जाए या मुस्लिम वोट बैंक को अपने साथ जोड़ने की रणनीति, यह आने वाला वक्त और चुनावी नतीजे बताएंगे। लेकिन इतना जरूर है कि नागौर हादसे के बाद उनका मुस्लिम समाज के साथ खड़ा होना और दिया गया बयान राजस्थान की सियासत में एक बार फिर नई चर्चा छेड़ गया है।
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